बिना ट्रांसलेटर कैसे बात करते हैं PM मोदी? कान में लगे डिवाइस का हाईटेक सच…

Ritu Raj

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मध्य पूर्व यात्रा के दौरान ओमान से सामने आई एक तस्वीर ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं। दरअसल, पीएम मोदी के कानों में लगी एक छोटी-सी मशीन लोगों की नजरों में आ गई, जिसके बाद इंटरनेट पर सवालों और अटकलों का दौर शुरू हो गया। फोटो और वीडियो वायरल होते ही यूज़र्स यह जानने को उत्सुक हो गए कि आखिर प्रधानमंत्री के कान में लगी यह डिवाइस क्या है, इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है और यह कैसे काम करती है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह के दावे और बहस देखने को मिली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओमान दौरे के दौरान उनके कानों में लगी छोटी सी डिवाइस ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा और सोशल मीडिया पर यह तेजी से वायरल हो गई। यह कोई मेडिकल डिवाइस नहीं है, बल्कि रियल टाइम ट्रांसलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाला उच्च तकनीक वाला उपकरण है। इस डिवाइस की मदद से प्रधानमंत्री को किसी भी विदेशी भाषा को तुरंत अपनी चुनी हुई भाषा में समझने की सुविधा मिलती है। जब मोदी साहब ओमान के प्रधानमंत्री सैयद शिहाब बिन तारिक अल सैद से मुलाकात कर रहे थे, तब यह डिवाइस उनके कान में नजर आई। ऐसे डिवाइस का उपयोग दुनिया के कई नेता और अधिकारी हाई-लेवल मीटिंग्स और अंतरराष्ट्रीय दौरे के दौरान करते हैं ताकि भाषा की बाधा उनके संवाद में रोड़ा न बने। इस तरह की तकनीक से बड़े स्तर की बातचीत और बातचीत की प्रक्रियाओं को सहज और प्रभावी बनाया जा सकता है। हालांकि, इस डिवाइस की तकनीक इतनी उन्नत है कि यह सामने बोलने वाले व्यक्ति की आवाज़ को तुरंत डिजिटल सिग्नल में बदलकर उपयोगकर्ता की चुनी हुई भाषा में अनुवादित कर देती है। यानी जैसे ही कोई व्यक्ति कुछ बोलता है, उसे दूसरे व्यक्ति के कान में उसी समय उसकी भाषा में सुनाई देता है। इससे लंबी और जटिल बातचीत में भी भाषा की बाधा खत्म हो जाती है।

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गौरतलब है कि राजनीतिक और राजकीय दौरों में यह डिवाइस नेताओं के लिए बेहद उपयोगी साबित होती है। चाहे वह द्विपक्षीय वार्ता हो या बहुपक्षीय सम्मेलन, नेता बिना किसी रुकावट के अपनी बात रख सकते हैं और सामने वाले की बात को सही तरीके से समझ सकते हैं। इसके कारण बड़े स्तर की अंतरराष्ट्रीय मीटिंग्स और चर्चाओं में संवाद अधिक प्रभावी और समयबद्ध बन जाता है। इस तरह की तकनीक से भाषा की सीमा खत्म हो जाती है और वैश्विक नेतृत्व के बीच संचार को एक नया आयाम मिलता है, जो राजनेताओं के कामकाज को और अधिक सहज और पारदर्शी बनाता है।

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