I-PAC छापेमारी मामला: हाई कोर्ट में बढ़ी कानूनी रार, ED ने की सुनवाई रोकने की मांग, ममता बनर्जी पक्ष ने किया कड़ा विरोध

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
राजनीतिक परामर्शदाता फर्म आई-पैक (I-PAC) के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया छापेमारी का मामला अब कानूनी दांव-पेंचों में उलझ गया है। बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक बड़ा ट्विस्ट तब आया जब ED ने अदालत से इस मामले की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगाने की मांग की। एजेंसी का तर्क है कि मामला अब देश की शीर्ष अदालत के विचाराधीन है।

ED की दलील: मामला अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में
आई-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर हुई छापेमारी के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान, ED की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने जस्टिस शुभ्रा घोष की पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि इसी विषय को लेकर एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कानूनन, जब कोई मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हो, तो उसी मुद्दे पर उच्च न्यायालय को सुनवाई जारी नहीं रखनी चाहिए। इसी आधार पर ED ने हाई कोर्ट से सुनवाई टालने का अनुरोध किया है।

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ममता पक्ष का विरोध: डेटा की सुरक्षा का हवाला
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकीलों ने ED की इस मांग का पुरजोर विरोध किया। तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने स्पष्ट किया कि उनकी याचिका का मुख्य उद्देश्य पार्टी के गोपनीय डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्हें डर है कि छापेमारी के दौरान एकत्र किए गए डेटा का दुरुपयोग हो सकता है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अधिवक्ता और सांसद कल्याण बनर्जी ने भी ED द्वारा सुनवाई टालने की कोशिशों को मामले को लटकाने की रणनीति बताया।

मुख्यमंत्री को भी बनाया गया पक्षकार
इस मामले की गंभीरता इसलिए भी अधिक है क्योंकि ED ने अपनी याचिका में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी एक पक्षकार (Respondent) बनाया है। आई-पैक लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीतियां तैयार करती रही है, ऐसे में एजेंसी की कार्रवाई सीधे तौर पर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर रही है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद मामले पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करता है या डेटा सुरक्षा के मुद्दे पर अपनी सुनवाई जारी रखता है।

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