भारत ने शुरू किया ऑपरेशन सागर बंधु, श्रीलंका में चक्रवात ‘दितवा’ से भारी तबाही, IAF ने रातों-रात C-130 और IL-76 विमान भेजे

Ritu Raj

सिटीपोस्ट लाइव
हिंद महासागर में आए भीषण चक्रवात ‘दितवा’ (Ditwah) ने श्रीलंका में भयंकर तबाही मचाई है, जिसके कारण राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को शनिवार को पूरे देश में सार्वजनिक आपातकाल की घोषणा करनी पड़ी है। विपक्षी दलों ने भी सर्वदलीय बैठक में आपातकाल लागू करने की मांग की थी, जिसके बाद अब राहत और बचाव अभियानों में तेजी आने की उम्मीद है।

आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) के अनुसार, चक्रवात से आधिकारिक तौर पर 123 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 130 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। चक्रवात शनिवार को श्रीलंका को पार करते हुए दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ गया है, लेकिन इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव के कारण देश में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बना हुआ है। चक्रवात ने हजारों घरों और बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

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भारत बना ‘सागर बंधु’: त्वरित मानवीय सहायता
गंभीर मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील के बाद भारत ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत ने अपने सबसे करीबी पड़ोसी देश की सहायता के लिए ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ शुरू किया है, जिसके तहत भारतीय वायुसेना (IAF) और नौसेना के माध्यम से बड़े पैमाने पर राहत सामग्री और बचाव दल भेजे जा रहे हैं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि भारत के मानवीय सहायता मिशन के तहत भारतीय वायुसेना का एक IL-76 विमान कोलंबो पहुंच चुका है। यह विमान 9 टन राहत सामग्री और 80 एनडीआरएफ (NDRF) कर्मियों वाली दो अर्बन सर्च एंड रेस्क्यू टीमों के साथ कोलंबो पहुंचा। जयशंकर ने बताया कि अब तक वायु और समुद्र मार्ग से लगभग 27 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है।

IAF ने रातों-रात किए विमान रवाना
भारतीय वायुसेना ने चक्रवात से हुई तबाही का पैमाना स्पष्ट होते ही गुरुवार देर रात ऑपरेशन सागर बंधु को सक्रिय कर दिया था। 28/29 नवंबर 2025 की रात हिंडन एयरबेस से एक C-130 और एक IL-76 विमान रवाना किए गए, जिनमें 21 टन राहत सामग्री, 80 से अधिक एनडीआरएफ कर्मी और 8 टन विशेष उपकरण शामिल थे।

NDRF के अनुसार, करीब 21 टन आवश्यक सामग्री—जैसे- टेंट, कंबल, गद्दे, ‘डिग्निटी किट’ और अन्य जरूरी सामान—भी साथ भेजा गया है। यह सामग्री श्रीलंका में व्यापक बाढ़, जन-जीवन के संकट और बड़े पैमाने पर विस्थापन के बीच राहत प्रयासों को मजबूत करने का हिस्सा है।

हजारों घर नष्ट, 44,000 लोग विस्थापित
आपदा प्रबंधन केंद्र के अनुसार, देश भर में लगभग 15,000 घरों को नष्ट कर दिया गया है और करीब 44,000 लोगों को अस्थायी सरकारी शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। ‘सेंट्रल प्रोविंस’ के बैडुल्ला जिले में 49 और नुवारा एलिया जिले में 50 से अधिक मौतें रिपोर्ट की गई हैं। मध्य जिले कैंडी में नए भूस्खलन हुए हैं, और कोलंबो से बहने वाली केलानी नदी का जलस्तर तटबंध तोड़ चुका है, जिससे सैकड़ों लोग राहत शिविरों में पहुँचे हैं।

सेना, नौसेना और वायुसेना के हजारों जवान राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। भारत ने जोर देकर कहा है कि वह इस कठिन समय में श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा है, और यह मिशन भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का प्रतिबिंब है।

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