बिहार में हालिया राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहमति और क्रॉस वोटिंग के मुद्दे पर पार्टी के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के उम्मीदवार के समर्थन में उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ काम किया, लेकिन कुछ विधायकों के रुख पर पार्टी नेतृत्व ही अंतिम निर्णय लेगा।
राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के तीन विधायकों द्वारा कथित तौर पर ‘गच्छा’ देने के सवाल पर अखिलेश सिंह ने कहा कि उन्होंने यूपीए (महागठबंधन) प्रत्याशी के पक्ष में अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन की राजनीति में सभी दलों की अपनी-अपनी भूमिका होती है और उसी के अनुसार निर्णय लिए जाते हैं। कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी कलह और संगठन की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात हर कांग्रेसी के लिए पीड़ादायक हैं। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी आलाकमान समय आने पर इस स्थिति से निपटने के लिए ठोस कदम उठाएगा। “ऐसे नहीं छोड़ा जाएगा,” उन्होंने कहा, संकेत देते हुए कि अनुशासन और संगठनात्मक मजबूती को लेकर कार्रवाई संभव है।
उम्मीदवार चयन को लेकर उठे विवाद पर, खासकर राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादवके फैसलों पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश सिंह ने कहा कि जब उम्मीदवार आरजेडी का होता है, तो कांग्रेस की उसमें सीधी भूमिका नहीं होती। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के तहत पहले से तय प्रक्रिया के अनुसार ही उम्मीदवारों का चयन होता है और इसमें सभी दलों के नेताओं से चर्चा की जाती है। जातीय आधार पर उम्मीदवार तय किए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि “उम्मीदवार, उम्मीदवार होता है”, चाहे वह किसी भी जाति का हो(भूमिहार, दलित या पिछड़ा वर्ग)। इस तरह के बयानों को उन्होंने बेकार की बहस बताया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी प्रभारी की भूमिका पर उठ रहे सवालों के संदर्भ में अखिलेश सिंह ने सीधे तौर पर किसी पर जिम्मेदारी नहीं डाली, लेकिन यह संकेत जरूर दिया कि संगठनात्मक अनुशासन और विधायकों पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व गंभीरता से विचार करेगा। उन्होंने दोहराया कि इन सभी विषयों पर अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान द्वारा ही लिया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर उभरी यह असहमति आने वाले समय में पार्टी संगठन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है, खासकर तब जब बिहार में महागठबंधन की राजनीति अहम मोड़ पर खड़ी है।