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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान (6 नवंबर) और नामांकन की अंतिम तारीख (17 अक्टूबर) नजदीक आने के साथ ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीटों के बंटवारे को लेकर तस्वीर साफ होने लगी है। इसी कड़ी में, NDA के महत्वपूर्ण घटक दल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) [HAM(S)] के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए संकेत दिया है कि उनकी पार्टी का सीट बंटवारा अंतिम रूप ले चुका है।
सीट बंटवारे को लेकर हुई लंबी चर्चाओं के बाद मांझी ने घोषणा की कि उनकी सीट ‘लॉक’ हो गई है और वह अब पटना के लिए वापस लौट रहे हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा, “मैं जीतन राम मांझी अपने अंतिम साँस तक माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ रहूँगा।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार में ‘बहार होगी, नीतीश संग मोदी जी की सरकार होगी।’
8 सीटों पर बनी सहमति, औपचारिक घोषणा का इंतजार
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीतन राम मांझी की पार्टी HAM(S) को गठबंधन के तहत आठ विधानसभा सीटें ऑफर की हैं, और मांझी ने इस संख्या पर अपनी सहमति दे दी है। हालांकि, सीटों के नाम और औपचारिक घोषणा अभी होनी बाकी है, लेकिन मांझी का ‘सीट लॉक’ करने का संकेत यह बताता है कि NDA अपने छोटे सहयोगियों के साथ सीट तालमेल को लेकर एक स्पष्ट और संगठित रणनीति पर काम कर रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार की सियासत में जीतन राम मांझी का दलित समुदाय में महत्वपूर्ण प्रभाव है। उनकी पार्टी की हिस्सेदारी सुनिश्चित होने से NDA को गठबंधन में स्थिरता मिलेगी और चुनावी मैदान में मजबूती प्रदान होगी। जब विपक्षी महागठबंधन (राजद और कांग्रेस) में सीट बंटवारे को लेकर अभी भी खींचतान जारी है, ऐसे में NDA द्वारा घटक दलों को संतुष्ट करने का यह कदम उसकी संगठित रणनीति का स्पष्ट प्रमाण है।
चुनावी रणनीति को मिलेगा बल
जीतन राम मांझी की सीट सुनिश्चित होने से अब NDA का केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही उम्मीदवारों के चयन और प्रचार-प्रसार की रणनीति को अंतिम रूप दे सकेगा। मांझी ने जोर दिया है कि गठबंधन सभी घटक दलों के बीच संतुलन बनाए रखने और सभी को साथ लेकर ही चुनाव मैदान में उतरने की योजना बना रहा है।
यह कदम इसलिए भी संवेदनशील है, क्योंकि नामांकन की अंतिम तिथि में अब बहुत कम समय बचा है। ऐसे में घटक दलों की सहमति और सीट घोषणा का महत्व काफी बढ़ जाता है। मांझी के इस समर्थन और उनकी सीट ‘लॉक’ होने से NDA की चुनावी रणनीति में स्थिरता आई है और गठबंधन अब पूरी ताकत के साथ पहले चरण के चुनाव प्रचार पर ध्यान केंद्रित कर पाएगा। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का यह दौर राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, और NDA ने एक महत्वपूर्ण सहयोगी के समर्थन को सुनिश्चित कर अपनी चुनावी तैयारी को मजबूत कर लिया है।