PMCH में बुधवार को मरीज की मौत के बाद मचे बवाल से शुरू हुआ चिकित्सा संकट आखिर थम गया। 3 घंटे की मैराथन वार्ता के बाद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली। 70 वर्षीय सुरेश सिंह की मौत की सूचना मिलते ही भड़के परिजनों द्वारा मेडिसिन इमरजेंसी में डॉक्टरों से की गई मारपीट के विरोध में JDA ने OPD सेवाएं बंद कर दी थीं। बातचीत के बाद सभी डॉक्टर काम पर लौट आए हैं और अस्पताल सेवाएं फिर सामान्य होने लगी हैं।
मामले का एक और पहलू यह भी सामने आया है कि मृतक सुरेश सिंह के बेटे अमन सिंह, उनकी बहन और परिजनों के साथ भी कथित रूप से मारपीट की गई। परिवार का आरोप है कि डॉक्टरों ने हेलमेट, लाठी-डंडे और स्टिक का इस्तेमाल कर उन पर हमला किया। विवाद के बाद दोनों पक्षों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस पूरे प्रकरण की जांच में जुट गई है। वहीं, जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार सुरक्षा व्यवस्था में चूक के कारण ऐसे हालात बनते हैं, इसी वजह से वे हड़ताल पर गए थे। हड़ताल के चलते PMCH की OPD और इमरजेंसी दोनों सेवाएं ठप हो गईं, जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि 2 हजार से अधिक मरीज बिना इलाज ही लौट गए और 100 नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा सका।
जूनियर डॉक्टरों की ओर से सुरक्षा को लेकर उठाए गए सवालों ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। डॉक्टर्स का कहना है कि जब तक सभी विभागों में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू नहीं होती, हिंसा की हर घटना पर स्वतः FIR दर्ज नहीं की जाती और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों को सख्ती से लागू नहीं किया जाता, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। फिलहाल, हड़ताल के कारण इलाज ठप होने से परेशान मरीज हालात सामान्य होने का इंतज़ार कर रहे हैं और पूरा मामला प्रशासनिक कार्रवाई पर टिका हुआ है।