सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की तेज़ रफ़्तार विकास दर के बीच अब वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं। विधानसभा में पेश कैग (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2024 तक राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं और विभागों से जुड़े 70,877.61 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जमा नहीं कर सकी। वहीं, विपक्ष ने इसे अब तक का सबसे बड़ा घोटाला बताया है और जन सुराज ने इस मामले की जांच की मांग को लेकर पटना हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। जन सुराज का दावा है कि यह घोटाला बिहार के वार्षिक बजट का लगभग एक-तिहाई है और अगर इसे रोका नहीं गया तो राशि 1.40 लाख करोड़ तक पहुँच सकती है।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने हाल के विधानसभा सत्र में ही इस मुद्दे को उठाया था। उनका आरोप है कि सरकार जनता के पैसे का दुरुपयोग कर रही है और योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुँच रहा। जन सुराज ने इसे “चारा घोटाले से 70 गुना बड़ा” करार दिया है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे सामान्य प्रक्रिया बताया। उनका कहना है कि—यह “प्रोसीजरल डिले” है, घोटाला नहीं।
गौरतलब है कि यह विवाद 2025 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल को गरमा सकता है। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार का बड़ा मुद्दा बनाना चाहता है, जबकि सरकार अपनी छवि बचाने में जुटी है।