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पटना। जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार के नेतृत्व में पश्चिमी चंपारण के भितिहरवा से ‘नौकरी दो, पलायन रोको’ यात्रा की शुरुआत हुई। इस यात्रा में हज़ारों युवा और पुरुष शामिल हुए, लेकिन महिलाओं की संख्या बेहद कम रही। खास बात यह रही कि इस विशाल पदयात्रा में केवल एक महिला शामिल थीं, जिनका नाम है अचला सिंह।

‘मिस्ट्री वूमन’ बनीं चर्चा का विषय
हजारों पुरुषों के बीच अकेली महिला के रूप में यात्रा में तेज़ी से कदम बढ़ाती अचला सिंह सभी की नज़रों में आ गईं। लोग उन्हें ‘मिस्ट्री वूमन’ कहकर पुकारने लगे, क्योंकि वे इतनी तेज़ चल रही थीं कि कई पुरुष पीछे छूट गए और उनके साथ कदम से कदम मिलाने वाले भी हांफने लगे। लेकिन अब इस मिस्ट्री को सुलझा लिया गया है।
अचला सिंह बिहार कांग्रेस की सक्रिय नेता हैं और कैमूर जिले के चैनपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। उनके पति मधुकर सिंह, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले हैं, पटना में मैजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे भभुआ में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

चैनपुर में मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश
पटना में रहने वाली अचला सिंह अपने विधानसभा क्षेत्र चैनपुर में लगातार सक्रिय रहती हैं। वे गांव-गांव जाकर जनता, विशेष रूप से महिलाओं से जुड़ने का प्रयास कर रही हैं। राजनीति के साथ-साथ खेल और सामाजिक गतिविधियों में भी उनकी रुचि देखी जाती है। हाल ही में चैनपुर में आयोजित क्रिकेट टूर्नामेंट में उन्होंने चौके-छक्के लगाए और इस प्रतियोगिता का उद्घाटन भी किया। इसके अलावा, वे धार्मिक प्रवृत्ति की भी हैं और मंदिरों में पूजा-पाठ व कीर्तन में सक्रिय भाग लेती हैं।
लेकिन जब बात राजनीतिक हमलों की आती है, तो वे सोशल मीडिया पर पूरी आक्रामकता के साथ विरोधियों पर निशाना साधती हैं। माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उनके पोस्ट और बयान अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं। चैनपुर विधानसभा से 2020 में बसपा के टिकट पर जीतकर जमा खान विधायक बने थे, लेकिन बाद में वे जदयू में शामिल हो गए और वर्तमान में बिहार सरकार में मंत्री हैं। अचला सिंह उन पर लगातार हमले बोलती रहती हैं और उन्हें क्षेत्र के विकास में असफल बताते हुए आगामी चुनाव में हराने का ऐलान कर चुकी हैं।

कांग्रेस से टिकट मिलने पर संशय
कैमूर जिले से कांग्रेस के कई बड़े नेता चैनपुर सीट से दावेदारी कर रहे हैं, जिससे अचला सिंह के लिए टिकट पाना आसान नहीं होगा। हालांकि, वे कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ लगातार संपर्क में हैं। वे पटना स्थित सदाकत आश्रम और पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होती रहती हैं।
माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स पर वे कांग्रेस नेताओं जैसे कृष्णा अल्लावरु और बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह के साथ अपनी तस्वीरें साझा करती रहती हैं। वे कांग्रेस के अभियान ‘बोले बिहार, बदले सरकार’ का समर्थन करती हैं और भाजपा-जदयू गठबंधन को हटाने की मांग करती हैं। हालांकि, जानकारों की मानें तो कांग्रेस का टिकट पाना उनके लिए आसान नहीं होगा। यही कारण है कि वे खुद को पार्टी के लिए एक मज़बूत उम्मीदवार साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।
अचला सिंह ने कानून की पढ़ाई की है और वे खुद एक लीगल कंसलटेंट भी हैं। ऐसे में बिहार की राजनीति में पढ़ी-लिखी महिलाओं का आगे आना एक सकारात्मक बदलाव हो सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘नौकरी दो, पलायन रोको’ यात्रा से मिली लोकप्रियता उन्हें कांग्रेस का टिकट दिलाने में कितनी मदद करती है और वे बिहार की राजनीति में कितनी आगे बढ़ पाती हैं।