काराकाट का चुनावी संग्राम: जुबां पर ‘विकास’, दिल में ‘जातीय समीकरण’; 13 प्रत्याशियों के बीच दिलचस्प मुकाबला

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज होने के साथ ही काराकाट विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक तापमान चरम पर है। नेता और दल मंचों से भले ही विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बड़े मुद्दों की बात कर रहे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता के बीच चर्चा आज भी जातीय समीकरणों और उम्मीदवार की सामाजिक पकड़ पर ही केंद्रित है। इस बार काराकाट में मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, जहाँ कुल 13 प्रत्याशी चुनावी रण में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

मैदान में प्रमुख दावेदार

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इस बार के चुनावी समर में एनडीए की ओर से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) मैदान में है, जबकि महागठबंधन ने यह सीट अपनी सहयोगी पार्टी भाकपा (माले) को दी है। इन प्रमुख गठबंधनों के अलावा, प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इन सबके बीच कई निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं, जो जातीय मतों का विभाजन करके पूरे चुनावी समीकरण को बिगाड़ने की ताकत रखते हैं।

मतदाता विकास की बातें तो सुन रहे हैं, लेकिन गांव-गांव और टोले-टोले में वोट का रुझान उम्मीदवार की जातिगत निष्ठा और सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द ही घूम रहा है। पिछली बार के चुनाव परिणाम में भी मतों का विभाजन इसी आधार पर हुआ था, जिससे यह साफ है कि जातीय समीकरण हमेशा से यहां के परिणाम को प्रभावित करते रहे हैं।

मतदाता और मतदान केंद्र की स्थिति

काराकाट विधानसभा में कुल 3,29,269 मतदाता हैं, जिनमें पुरुषों की संख्या 1,74,069 और महिलाओं की संख्या 1,55,180 है। इस सीट पर 7784 युवा मतदाता और 3639 दिव्यांग मतदाता भी शामिल हैं, जिनकी भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।

प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से तैयारियां शुरू कर दी हैं। पूरे क्षेत्र में कुल 409 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें बिक्रमगंज, संझौली और काराकाट प्रखंड के केंद्र शामिल हैं। सुरक्षा के लिहाज से 203 मतदान केंद्रों को अति संवेदनशील घोषित किया गया है। इसके अलावा, 5 आदर्श मतदान केंद्र भी बनाए गए हैं, जहाँ सभी मतदान कर्मी महिलाएं होंगी।

काराकाट का चुनावी संग्राम इस बार केवल दलों के बीच नहीं, बल्कि विचारधाराओं और जातीय निष्ठाओं के बीच टकराव बन गया है। अब जनता को यह तय करना है कि क्या वे इस बार ‘विकास’ को जिताएंगे, या फिर पुराने ढर्रे पर ‘जाति’ ही परिणाम पर हावी रहेगी।

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