सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले केरल कांग्रेस द्वारा बीड़ी और बिहार की तुलना करने वाले एक विवादित ट्वीट पर सियासी तूफान खड़ा हो गया था। एनडीए नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया और जनता के दबाव के बाद, अब केरल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर माफी मांग ली है। इस माफी को डैमेज कंट्रोल की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इस विवाद को शांत किया जा सके।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब केरल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक पोस्ट किया, जिसमें लिखा था, “Bidis and Bihar start with B. Cannot be considered a sin anymore.” इस ट्वीट को लेकर भाजपा और जदयू जैसे एनडीए के घटक दलों ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे बिहार की अस्मिता पर हमला करार दिया।
बढ़ते बवाल के बाद, केरल कांग्रेस ने अपने पोस्ट को हटा दिया और एक नया ट्वीट कर माफी मांगी। उन्होंने लिखा, “अगर हमारे पोस्ट से किसी को ठेस पहुंची तो उसके लिए हम खेद प्रकट करते हैं। हमारा इरादा किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था।”
हालांकि, इस माफी के बावजूद एनडीए के नेता इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने इस माफी को जनता के गुस्से का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस का असली चरित्र बार-बार सामने आ रहा है। पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की माता जी का अपमान और अब बिहार की तुलना बीड़ी से। यह माफी जनता के गुस्से का नतीजा है। बिहार की जनता इसे नहीं भूलेगी।”
जदयू के राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “B से सिर्फ बीड़ी नहीं, बुद्धि भी होती है, जो कांग्रेस के पास नहीं है। बिहार का अपमान करने की उनकी आदत है, लेकिन जनता इसका जवाब वोट से देगी।”
वहीं, बिहार में कांग्रेस की सहयोगी राजद के नेता तेजस्वी यादव ने इस मामले पर सीधे-सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उन्होंने पोस्ट नहीं देखा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बिहार को लेकर इस तरह के पोस्ट करने पर माफी मांगनी ही चाहिए। तेजस्वी का यह बयान कांग्रेस के लिए एक असहज स्थिति पैदा कर गया, क्योंकि उन्हें अपने सहयोगी के इस कदम पर खुलकर समर्थन या विरोध करने में मुश्किल हुई।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो रही हैं। भाजपा और जदयू इसे कांग्रेस को घेरने के एक अवसर के रूप में देख रहे हैं, जबकि कांग्रेस इस डैमेज कंट्रोल के जरिए अपने वोट बैंक को बचाने की कोशिश कर रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केरल कांग्रेस की यह माफी इस मुद्दे को शांत कर पाती है, या यह आगामी चुनावों में एक प्रमुख मुद्दा बनकर रहेगा।