बिहार चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सूबे की राजनीति में वोट और सीटों का समीकरण हमेशा सीधा नहीं होता। राज्यभर में हुई रिकॉर्ड वोटिंग के बीच जहाँ आरजेडी ने सबसे अधिक 1.15 करोड़ वोट बटोरकर बढ़त बनाई। वहीं बीजेपी उससे करीब 14 लाख कम वोट लेकर भी सीटों के मामले में कहीं आगे निकल गई। नतीजा यह हुआ कि वोट शेयर में नंबर-1 रही आरजेडी सीटों में बीजेपी से पूरे 64 सीट पीछे रह गई। यह अंतर बताता है कि इस बार मतदाता की पसंद कैसे नई दिशा में बहती हुई दिखाई दी।
दरअसल, इस बार बिहार चुनाव में वोट शेयर को लेकर तस्वीर काफी दिलचस्प रही। महागठबंधन को कुल 1.88 करोड़ वोट मिले, जिनमें अकेले आरजेडी ने 1.15 करोड़ वोट हासिल करते हुए पूरे गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बढ़त बनाए रखी। कांग्रेस को 43.7 लाख, भाकपा माले को 14.2 लाख, सीपीआई को 3.72 लाख, आईआईपी को 1.84 लाख और वीआईपी को 6.84 लाख वोट मिले। उधर एनडीए ने कुल 2 करोड़ 33 लाख वोट बटोरकर बढ़त बनाई। बीजेपी को 1 करोड़ वोट मिले, जबकि जेडीयू 96.67 लाख वोट के साथ दूसरे स्थान पर रही। लोजपा ने 24.97 लाख, हम ने 5.87 लाख और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने 5.33 लाख वोट हासिल किए। कुल आंकड़ों में आरजेडी इस बार वोट शेयर की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि बीजेपी दूसरे और जेडीयू तीसरे स्थान पर रही। सीटों के उलट-पुलट नतीजों के बीच वोटों का यह अंतर चुनाव का सबसे उल्लेखनीय पहलू बन गया।
सीटों के अंतिम आंकड़े साफ दिखाते हैं कि इस चुनाव में वोट शेयर और सीटों का रिश्ता पूरी तरह उलट गया। जहाँ आरजेडी अधिक वोट पाने के बावजूद सिर्फ 25 सीटों तक सिमट गई, वहीं बीजेपी ने कम सीटों पर लड़कर भी 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल कर लिया। जेडीयू ने 85 और लोजपा ने 19 सीटें जीतकर एनडीए की बढ़त को और मजबूत किया। कांग्रेस 6 सीटों पर और हम 5 सीटों पर सिमट गई। कुल मिलाकर नतीजों ने यह संदेश दिया कि बिहार में जीत सिर्फ वोटों की संख्या से नहीं, बल्कि वोटों के सही बिखराव और सटीक सीट रणनीति से तय होती है।