खेसारी लाल यादव का राजनीति से ‘तौबा’: बोले- “झूठ बोलना नहीं आता इसलिए कलाकार ही सही”, हार के लिए जनता को ठहराया जिम्मेदार

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
भोजपुरी सिनेमा के ‘हिट मशीन’ कहे जाने वाले गायक और अभिनेता खेसारी लाल यादव का राजनीति से मोहभंग होता नजर आ रहा है। हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद खेसारी के तेवर बदले-बदले दिख रहे हैं। शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने न केवल राजनीति को ‘झूठ का खेल’ बताया, बल्कि अपनी हार और बिहार की मौजूदा स्थिति के लिए सीधे तौर पर जनता की सोच को कटघरे में खड़ा कर दिया।

“सच बोलने वालों के लिए नहीं है राजनीति”
खेसारी लाल यादव ने अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में कहा कि राजनीति में ईमानदारी और सच्चाई की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि जो इंसान सच बोलता है, वह राजनीति में बहुत ऊपर तक नहीं जा सकता। यहाँ सिर्फ झूठे वादे करने पड़ते हैं। अगर आपको दुनिया को बेवकूफ बनाना आता है, तभी आप राजनीति में आइए।” खेसारी ने साफ किया कि वे एक कलाकार के रूप में ही बेहतर हैं क्योंकि उन्होंने अपना पूरा करियर ईमानदारी और मेहनत के दम पर बनाया है, जबकि राजनीति में ‘सच’ एक समस्या बन जाता है।

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हार का ठीकरा जनता के सिर
छपरा विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे खेसारी को उम्मीद थी कि उनकी लोकप्रियता वोटों में तब्दील होगी, लेकिन परिणाम इसके उलट रहे। अपनी हार के कारणों पर चर्चा करते हुए उन्होंने जनता पर निशाना साधा। खेसारी ने कहा, “अगर बिहार की जनता को बदलाव ही नहीं चाहिए या उन्हें बेहतर विकल्प की तलाश नहीं है, तो इसके लिए कोई नेता या पार्टी दोषी नहीं है। इसकी पूरी जिम्मेदारी जनता को खुद उठानी होगी।” उन्होंने आगे कहा कि अगर लोगों को लगता है कि वर्तमान स्थिति ही उनके बच्चों के भविष्य के लिए सही है, तो यह उनकी अपनी सोच है।

कलाकार बनाम राजनेता
खेसारी ने बिहार के मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि यदि वे अपने बच्चों का बेहतर भविष्य चाहते हैं, तो उन्हें जाति और पुराने ढर्रे से ऊपर उठकर बेहतर विकल्प चुनना होगा। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वे अपने बच्चों के लिए बेहतर कर रहे हैं और एक कलाकार के तौर पर खुश हैं। उनके इस बयान से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि निकट भविष्य में वे सक्रिय राजनीति से दूरी बना सकते हैं और अपना पूरा ध्यान फिर से बड़े पर्दे पर केंद्रित करेंगे।

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग उन्हें सच बोलने वाला निर्भीक कलाकार बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि चुनाव हारने के बाद जनता को दोषी ठहराना एक परिपक्व राजनेता की पहचान नहीं है।

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