कोमल सिंह को नीतीश का आशीर्वाद, गायघाट सीट पर JDU की प्रत्याशी बनीं

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुजफ्फरपुर जिले की गायघाट विधानसभा सीट हॉट सीट बन गई है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने इस सीट से कोमल सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है, जिनका राजनीतिक सफर और पारिवारिक पृष्ठभूमि काफी दिलचस्प है। लाखों की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर राजनीति में आईं कोमल सिंह, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सुप्रीमो चिराग पासवान की भी ‘दुलारी’ मानी जाती हैं। लेकिन इस बार चुनावी मैदान में उन्हें अपने ‘चाचा’ नीतीश कुमार का आशीर्वाद मिला है, जिससे उनकी जीत की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। कोमल सिंह ने 16 अक्टूबर को अपना नामांकन दाखिल किया है।

पारिवारिक दबदबा: हर दल में माता-पिता की पकड़

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कोमल सिंह को राजनीति विरासत में मिली है। उनके माता-पिता का बिहार की राजनीति में हर दल में मजबूत दबदबा रहा है।

मां वीणा देवी: वैशाली लोकसभा सीट से वर्तमान में लोजपा (रामविलास) की सांसद हैं। सांसद बनने से पहले वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक भी रह चुकी हैं।

पिता दिनेश सिंह: जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) हैं।

माता-पिता की अलग-अलग दलों में मजबूत उपस्थिति कोमल सिंह को एक व्यापक राजनीतिक आधार प्रदान करती है। 2020 के चुनाव से ही उनके माता-पिता अपनी इकलौती बेटी को गायघाट से जीत दिलवाने में लगे हुए हैं, और 2025 में एनडीए गठबंधन की प्रत्याशी बनने के बाद उनकी सफलता की संभावनाएँ काफी प्रबल हो गई हैं।

दुश्मनी भूलकर नीतीश ने दिया आशीर्वाद

कोमल सिंह की उम्मीदवारी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में उनकी वजह से ही नीतीश कुमार की पार्टी को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। उस समय कोमल सिंह, लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं और उन्हें 37 हजार से अधिक वोट मिले थे। उनके चुनाव लड़ने के कारण जेडीयू उम्मीदवार महेश्वर यादव को राजद के निरंजन राय से 7,566 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि यदि चिराग पासवान ने कोमल सिंह को मैदान में नहीं उतारा होता, तो गायघाट से जेडीयू की जीत निश्चित थी।

हालांकि, 2020 की कड़वाहट को भुलाकर, चाचा नीतीश कुमार ने 2025 के चुनाव में कोमल सिंह को जेडीयू से टिकट देकर अपना आशीर्वाद दिया है। एनडीए गठबंधन में होने के कारण कोमल सिंह के सामने अब पिछले चुनाव जैसा कोई आंतरिक टकराव नहीं है। 2020 में तीसरे नंबर पर रहने के बावजूद, अब वह एनडीए की साझा शक्ति के साथ चुनावी मैदान में हैं, जिससे गायघाट सीट पर मुकाबला एकतरफा होने की उम्मीद है।

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