‘उलटी गंगा’ नहीं बहा सकते लालू: लैंड फॉर जॉब केस में दिल्ली कोर्ट की तीखी टिप्पणी, याचिका खारिज!..

Ritu Raj

रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेने के मामले में राजद (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को दिल्ली की विशेष अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए गए 1,600 से अधिक अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग की गई थी।

अदालत ने क्यों ठुकराई मांग?
अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणियां कीं। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में ‘अनरिलायड’ (चार्जशीट में उपयोग न किए गए दस्तावेज) की मांग करना न्यायिक प्रक्रिया को जानबूझकर उलझाने जैसा है। कोर्ट के अनुसार यह मांग सुनवाई को टालने और मुकदमे को लंबा खींचने की एक कोशिश प्रतीत होती है। अपने 35 पन्नों के आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि सुनवाई की शर्तें आरोपी तय नहीं कर सकते, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा नियंत्रण न्यायालय का होता है। जज ने यह भी याद दिलाया कि आरोपियों को पहले ही उन दस्तावेजों के निरीक्षण का अवसर दिया जा चुका है, जिनका उपयोग सीबीआई ने सबूत के रूप में नहीं किया है।

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किसे-किसे लगा झटका?
अदालत ने इस मामले में केवल लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ही नहीं, बल्कि अन्य आरोपियों की अर्जियां भी खारिज कर दीं। इनमें पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके तत्कालीन निजी सचिव आर.के. महाजन और मीडिया कंपनी के महाप्रबंधक महीप कपूर शामिल हैं।

क्या है पूरा घोटाला?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों और उनके परिवारों से जमीन ली गई। बताया जाता है कि ये जमीनों के सौदे लालू परिवार के सदस्यों या उनके करीबी लोगों के नाम पर किए गए। इस मामले में सीबीआई ने मई 2022 में केस दर्ज किया था, जिसमें लालू प्रसाद यादव की बेटियों समेत कई अन्य लोगों को भी नामजद किया गया है।

क्या है लैंड फॉर जॉब स्कैम?

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