Land-for-Jobs Case: लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका: लैंड-फॉर-जॉब्स केस में याचिका खारिज, पर मिली ये बड़ी राहत!..

Ritu Raj

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के लिए कानूनी मोर्चे पर मिली-जुली खबर आई है। लैंड-फॉर-जॉब्स (जमीन के बदले नौकरी) घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही और एफआईआर (FIR) को निरस्त करने की मांग की थी।

अदालत का मुख्य फैसला;
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लालू यादव के खिलाफ दर्ज एफआईआर को इस चरण पर रद्द नहीं किया जा सकता। इसका अर्थ यह है कि उनके खिलाफ कानूनी जांच और मुकदमा जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि मामले के तथ्यों, साक्ष्यों और मेरिट (गुण-दोष) पर विचार करने का पूरा अधिकार ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) के पास सुरक्षित है।

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व्यक्तिगत पेशी से मिली ‘आंशिक राहत’;
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव की सेहत और उम्र को ध्यान में रखते हुए उन्हें एक बड़ी राहत भी दी है। अब उन्हें ट्रायल के दौरान हर सुनवाई पर निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित (Personal Appearance) होने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, यह रियायत उनके वकीलों के माध्यम से अदालती कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति देती है, जिससे उन्हें बार-बार कोर्ट के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी।

क्या है लैंड-फॉर-जॉब्स मामला?
यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे के विभिन्न जोनों (जैसे ग्रुप-डी पदों) में नियुक्तियों के बदले में उम्मीदवारों और उनके परिवारों से जमीनें बेहद कम दामों पर या उपहार के रूप में लिखवाई गईं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का दावा है कि इन जमीनों का हस्तांतरण लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर किया गया था। आरोप है कि इन नियुक्तियों के लिए रेलवे के निर्धारित नियमों और विज्ञापनों की अनदेखी की गई थी।

आगे की राह;
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब गेंद पूरी तरह से निचली अदालत के पाले में है। अब ट्रायल कोर्ट साक्ष्यों के आधार पर यह तय करेगी कि लालू यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगे आरोप कितने पुख्ता हैं। वैसे बिहार की राजनीति में सक्रिय लालू यादव के लिए यह कानूनी प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इस मामले में उनके परिवार के अन्य सदस्य (जैसे तेजस्वी यादव और मीसा भारती) भी जांच के दायरे में रहे हैं।

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