बिहार में 16 वर्षीय किशोरी की जबरन शादी: सुप्रीम कोर्ट ने दी सुरक्षा और हस्तक्षेप के निर्देश

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की एक 16 वर्षीय लड़की द्वारा जबरन कराई गई शादी को चुनौती देने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गंभीर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने बिहार सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और साथ ही लड़की और उसके उस मित्र को पूर्ण सुरक्षा देने का आदेश दिया है, जिस पर उसके “अपहरण” का झूठा मामला दर्ज किया गया है।

न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने पुलिस से 15 जुलाई तक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपने को कहा है। याचिका में कहा गया है कि लड़की की शादी 9 दिसंबर 2023 को एक 33 वर्षीय सिविल कॉन्ट्रैक्टर से जबरदस्ती और पारिवारिक दबाव में कराई गई, जबकि वह 10वीं बोर्ड की परीक्षा देने वाली थी।

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शादी के बाद उसे तुरंत ससुराल भेज दिया गया, जहाँ उसे लगातार शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उसके पति ने यह दावा किया कि लड़की के माता-पिता उसके कर्जदार हैं और इसलिए लड़की को आगे की पढ़ाई छोड़ कर वैवाहिक जीवन में रहना होगा।

लड़की ने याचिका में बताया कि पति और ससुराल वाले उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालते थे, और इंकार करने पर उसे प्रताड़ित करते थे। जनवरी में किसी तरह मामा के हस्तक्षेप से वह बोर्ड परीक्षा देने अपने घर आ पाई और विपरीत हालातों के बावजूद उसने मैट्रिक की परीक्षा पास की।

ससुराल और परिवार के दबाव से परेशान होकर लड़की ने अपने एक दोस्त की मदद से 31 मार्च को घर से भागकर वाराणसी चली गई, जिसके बाद से दोनों छिपते-फिरते रहे। अब लड़की के परिवार ने दोस्त और उसके परिवार पर अपहरण का केस दर्ज करवा दिया है, और कथित रूप से पुलिस द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है ताकि लड़की को फिर से ससुराल भेजा जा सके।

याचिका में लड़की ने अपने पति पर यह भी आरोप लगाया है कि उसने गाँव में खुलेआम कहा है कि वह उसे मार देगा और जेल जाने से नहीं डरेगा। लड़की का कहना है कि राज्य सरकार और प्रशासन बाल विवाह निषेध कानून, 2006 के तहत उसे न्याय दिलाने में विफल रहे हैं। यह मामला न केवल बाल विवाह, बल्कि नारी सुरक्षा और कानून की निष्क्रियता के गंभीर प्रश्न खड़ा करता है, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट की नज़र है।

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