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हर व्यक्ति को कम से कम 8 घंटे सोना बहुत जरूरी है। अच्छी और पर्याप्त नींद हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद जरूरी है। पर्याप्त नींद हमारे शरीर को पूरे दिन ऊर्जावान बनाए रखता है। तेजी से बदलती जीवनशैली और बढ़ते डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल ने नींद की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
हाल ही में जारी एक स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर तीन में से एक व्यक्ति नींद की समस्या से जूझ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 18 से 35 वर्ष की उम्र के युवा वर्ग में अनिद्रा, नींद टूटना और देर से सोने की आदतें तेजी से बढ़ी हैं। अमेरिका की हेल्थ एजेंसी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार औसतन एक वयस्क को प्रतिदिन 7-8 घंटे की नींद लेना चाहिए। लेकिन वर्तमान में ज्यादातर लोग 5-6 घंटे से ज्यादा सो नहीं पा रहे हैं। इसका नुकसान केवल मानसिक स्वास्थ्य पर नहीं बल्कि हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर शारीरिक रोगों का भी कारण बन रहा है।
हालांकि, कम नींद लेने से कॉग्नेटिव डिक्लाइन हो सकते हैं जिसका मतलब ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करना है। वहीं कॉर्डिनेशन और रिएक्शन समय को खराब करता है। इम्यूनिटी को कमजोर करता है। ज्यादा नींद की कमी से अवसाद और चिंता जैसे मेंटल डिसऑर्डर हो सकते हैं। भूख हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ देती है,जिससे भुख बढ़ सकती है और अनहेल्दी खाने की क्रेविंग होती है। नींद की लगातार कमी से शरीर में एक सूजन हो सकती है, जो हार्ट डिजीज, डायबिटीज और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर सहित कई हेल्थ कंडिशन से जुड़ी हुई है। वहीं सुस्ती, ड्राईनेस, झुर्रियां और मुंहासे और एक्जिमा जैसी त्वचा की समस्याओं का भी खतरा बढ़ जाता है।