राजस्थान रॉयल्स ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। इस बार मैदान के प्रदर्शन के बजाय अपनी ऐतिहासिक बिक्री को लेकर, क्योंकि IPL फ्रेंचाइजी लगभग 1.63 बिलियन डॉलर (करीब ₹15,289 करोड़) में बिक चुकी है और इसके साथ ही यह लीग की सबसे महंगी टीम बन गई है।

इस डील को भारतीय मूल के अमेरिकी उद्यमी काल सोमानी के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने पूरा किया। इस बोली ने 2021 में लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए RPSG ग्रुप द्वारा लगाए गए ₹7,090 करोड़ के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। अगर इसकी कीमत के सफर पर नजर डालें, तो 2008 में जब टीम पहली बार खरीदी गई थी, तब इसकी कीमत मात्र 67 मिलियन डॉलर (लगभग ₹260–270 करोड़) थी। आज के हिसाब से वही रकम करीब ₹628 करोड़ बैठती है। इस तरह 2026 में ₹15,289 करोड़ तक पहुंचना लगभग 24 गुना वृद्धि को दर्शाता है, जो IPL की तेजी से बढ़ती ब्रांड वैल्यू को भी दिखाता है। बोली की इस दौड़ में कई बड़े कॉर्पोरेट ग्रुप शामिल थे, जैसे आदित्य बिरला ग्रुप, टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप और कैपरी ग्लोबल। लेकिन अंत में सोमानी के कंसोर्टियम ने बाजी मार ली।

काल सोमानी पहले से ही 2021 से राजस्थान रॉयल्स में निवेशक रहे हैं। टेक्नोलॉजी, AI, डेटा प्राइवेसी और स्पोर्ट्स टेक जैसे क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है, और इस डील के बाद खेल उद्योग में उनकी मौजूदगी और मजबूत हो गई है। टीम के क्रिकेट इतिहास की बात करें, तो राजस्थान रॉयल्स ने 2008 में शेन वॉर्न की कप्तानी में IPL का पहला खिताब जीता था। हालांकि, इसके बाद टीम का प्रदर्शन उतना स्थिर नहीं रहा और 2022 में एक बार फाइनल तक पहुंची, जहां उसे गुजरात टाइटंस से हार का सामना करना पड़ा। फ्रेंचाइजी को 2015 के स्पॉट-फिक्सिंग विवाद के चलते 2016 और 2017 सीजन से प्रतिबंधित भी किया गया था। BCCI की लोढ़ा समिति की जांच के बाद यह कार्रवाई हुई थी। बाद में 2018 में टीम ने IPL में वापसी की। कुल मिलाकर, राजस्थान रॉयल्स की यह डील सिर्फ एक टीम की बिक्री नहीं, बल्कि IPL की बढ़ती आर्थिक ताकत और वैश्विक आकर्षण का बड़ा उदाहरण है।