बिहार की सियासत में अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में पशुपति कुमार पारस ने अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव के तहत नवादा के पूर्व सांसद चंदन सिंह को बिहार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चंदन सिंह, बाहुबली छवि वाले पूर्व सांसद सूरजभान सिंह के भाई भी हैं, जिससे इस नियुक्ति को राजनीतिक रूप से और अहम माना जा रहा है।
आपात बैठक में हुआ फैसला;
गुरुवार को पटना स्थित पार्टी कार्यालय में पशुपति कुमार पारस ने एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक के दौरान चंदन सिंह के नाम पर सहमति बनी और उन्हें औपचारिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया गया। इस मौके पर पारस ने उन्हें फूल-माला पहनाकर स्वागत किया, जबकि अन्य नेताओं ने भी उनका गर्मजोशी से अभिनंदन किया।
प्रिंस राज की जगह मिली जिम्मेदारी;
इससे पहले बिहार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी प्रिंस राज के पास थी, जो रिश्ते में पारस के भतीजे हैं। हालांकि हाल ही में प्रिंस राज को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया, जिसके बाद प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली हो गया था। इसी खाली पद को भरने के लिए चंदन सिंह को चुना गया।
सोशल मीडिया पर पुष्टि;
प्रिंस राज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए इस फैसले की पुष्टि की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि पटना में आयोजित कार्यकर्ता बैठक में चंदन सिंह को सर्वसम्मति से बिहार प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि चंदन सिंह के युवा और ऊर्जावान नेतृत्व में पार्टी संगठन और अधिक मजबूत होगा तथा नए आयाम स्थापित करेगा।
एक साल बाद सक्रिय राजनीति में वापसी;
चंदन सिंह 2019 के लोकसभा चुनाव में नवादा सीट से सांसद चुने गए थे। उस समय वे लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर जीते थे। बाद में जब पार्टी में विभाजन हुआ, तो उन्होंने पशुपति कुमार पारस का साथ दिया। बताया जाता है कि स्वास्थ्य कारणों से वे पिछले करीब एक वर्ष से सक्रिय राजनीति में कम नजर आ रहे थे। अब प्रदेश अध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता फिर से बढ़ने की संभावना है।
राजनीतिक रणनीति के संकेत;
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चंदन सिंह की नियुक्ति सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम भी है। उनकी छवि और सामाजिक-राजनीतिक पकड़ को देखते हुए यह माना जा रहा है कि पशुपति कुमार पारस सवर्ण वोट बैंक के साथ-साथ उन क्षेत्रों में भी प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं, जहां बाहुबली नेताओं का असर रहा है। इस तरह यह नियुक्ति रालोजपा के लिए आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने और सामाजिक समीकरण साधने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।