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बिहार की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर बाहुबली नेता अनंत सिंह ने मंगलवार को भारी सुरक्षा और गहमागहमी के बीच बिहार विधानसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। बीमार होने के कारण अनंत सिंह बेउर जेल से एम्बुलेंस के जरिए विधानसभा पहुंचे थे। मोकामा विधानसभा क्षेत्र से भारी मतों से जीत हासिल करने के बाद, सिंह की इस शपथ पर सबकी नजरें टिकी थीं।
शपथ ग्रहण और मुख्यमंत्री का आशीर्वाद
अनंत सिंह जब विधानसभा पहुंचे, तो उनके माथे पर लगा बड़ा तिलक चर्चा का विषय बना रहा। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने बिना दस्तावेज पढ़े ही पद की शपथ ली। शपथ लेने के तुरंत बाद वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास पहुंचे और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान सदन में मौजूद अन्य सदस्य इस दृश्य को कौतूहल के साथ देखते रहे। मुख्यमंत्री ने भी मुस्कुराते हुए उनके माथे पर लगे तिलक के बारे में पूछताछ की और उनकी सेहत का हाल जाना।
भारी सुरक्षा और कड़े नियम
अनंत सिंह फिलहाल दुलारचंद यादव हत्याकांड के सिलसिले में पिछले तीन महीनों से न्यायिक हिरासत में हैं। पटना सिविल कोर्ट ने उन्हें केवल शपथ ग्रहण के लिए विधानसभा जाने की अनुमति दी थी। सुरक्षा के मद्देनजर, विधानसभा परिसर को एक किले में तब्दील कर दिया गया था। चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही थी और क्विक रिस्पांस टीमें (QRT) तैनात थीं। समर्थकों के जमावड़े पर पूरी तरह रोक थी और सघन तलाशी के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी गई।
मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में सिंह ने कहा, “शपथ लेने में देरी मेरी खराब सेहत की वजह से हुई। जहाँ तक जेल से बाहर आने की बात है, तो यह पूरी तरह जज साहब पर निर्भर है। जब कानून का फैसला होगा, तभी मैं बाहर आऊंगा।”
संवैधानिक आवश्यकता
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 188 के अनुसार, किसी भी विधायक के लिए सदन की कार्यवाही में भाग लेने से पहले शपथ लेना अनिवार्य है। अनुच्छेद 193 इसके उल्लंघन पर दंड का प्रावधान करता है। इसी संवैधानिक बाध्यता के तहत जेल में रहते हुए भी अनंत सिंह का शपथ लेना आवश्यक था।
मोकामा के चुनावी नतीजों ने सिंह के दबदबे को एक बार फिर साबित किया है। उन्होंने आरजेडी की वीणा देवी को 28,206 वोटों के अंतर से हराया था। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद उन्हें पुनः एम्बुलेंस से बेउर जेल भेज दिया गया।