सिटी पोस्ट लाइव
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के लिए आईआरसीटीसी होटल टेंडर घोटाला एक बार फिर गले की हड्डी बनता जा रहा है। दिल्ली की एक विशेष सीबीआई अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान लगभग दो दर्जन (24) गवाहों ने आरोपियों के खिलाफ अपने बयान दर्ज करा दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, इन गवाहों की गवाही लालू परिवार की संलिप्तता की ओर पुख्ता इशारा कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जुलाई 2017 में दर्ज किया गया था, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान रांची और पुरी में स्थित रेलवे के ‘बीएनआर’ (BNR) होटलों के रखरखाव का ठेका निजी कंपनी सुजाता होटल्स को देने के बदले पटना में कीमती जमीन रिश्वत के तौर पर ली गई थी। सीबीआई का दावा है कि टेंडर की शर्तों में जानबूझकर हेरफेर की गई ताकि खास लोगों को फायदा पहुँचाया जा सके।
गवाहों की फेहरिस्त और कोर्ट की टिप्पणी
सीबीआई अगले हफ्ते दो दर्जन और गवाहों को अदालत के सामने पेश करने की तैयारी में है। विशेष सीबीआई न्यायाधीश विशाल गोगने ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए पहले ही टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लालू प्रसाद को पूरी प्रक्रिया की जानकारी थी और उन्होंने होटलों के हस्तांतरण को प्रभावित करने के लिए हस्तक्षेप किया था। कोर्ट ने यह भी माना कि टेंडर प्रक्रिया में बदलाव के बाद जमीन के प्लॉट्स का कम मूल्यांकन किया गया और अंततः वे लालू परिवार के नियंत्रण वाली कंपनियों के पास आ गए।
आगे की राह: जिरह का दौर शुरू होगा
फिलहाल अभियोजन पक्ष के गवाहों से पूछताछ जारी है। इस महीने के अंत तक बचाव पक्ष (लालू परिवार के वकील) इन गवाहों से जिरह (Cross-examination) शुरू कर सकते हैं। पिछले साल अक्टूबर में ही अदालत ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो लालू परिवार की राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें और ज्यादा गंभीर हो सकती हैं।