सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान के बाद सियासी गलियारों में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद और बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी पर मतदान में धोखाधड़ी करने और दो बार वोट डालने का गंभीर आरोप लगा है। यह विवाद उनकी एक तस्वीर के सामने आने के बाद शुरू हुआ है, जिसमें वह अपने दोनों हाथों की तर्जनी उंगली पर लगी स्याही दिखाती हुई नजर आ रही हैं।
आम तौर पर, चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, मतदान करने के बाद सिर्फ एक हाथ की तर्जनी उंगली पर ही अमिट स्याही लगाई जाती है, जो यह सुनिश्चित करता है कि कोई व्यक्ति दोबारा वोट न डाल सके। शांभवी चौधरी की दोनों उंगलियों पर स्याही का निशान दिखने के बाद से ही चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पटना के सेंट पॉल स्कूल में हुआ मतदान
सांसद शांभवी चौधरी ने पटना के बुद्धा कॉलोनी स्थित सेंट पॉल स्कूल में बने मतदान केंद्र पर अपने पिता अशोक चौधरी और मां नीता चौधरी के साथ वोट डाला था। मतदान के बाद उन्होंने जो तस्वीर साझा की, उसमें उनके दोनों हाथों की उंगलियों पर स्याही साफ दिख रही है। एक ही व्यक्ति द्वारा दो बार मतदान करना चुनावी कदाचार और फ्रॉड की श्रेणी में आता है, और इसी असामान्य दृश्य को लेकर विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है।
कांग्रेस और आरजेडी का तीखा हमला
शांभवी चौधरी की इस हरकत पर कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और सीधे चुनाव आयोग से जांच की मांग की है।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने तस्वीर साझा करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “बिहार में NDA की सांसद शांभवी चौधरी पहली बार चुनाव में दोनों उंगलियों में इंक लगाई जा रही है। ये लोग चुनाव और लोकतंत्र की कितनी धज्जियां उड़ाएंगे?”
आरजेडी प्रवक्ता कंचना यादव ने एक वीडियो पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि “यह तो एक अलग ही स्तर का फ्रॉड चल रहा है। ये हैं LJP सांसद शांभवी चौधरी। दोनों हाथों पर स्याही लगी हुई है। मतलब इन्होंने 2 बार वोट किया। जब यह बात सामने आ गई तो इनके पिता अशोक चौधरी इन्हें आँखों के इशारे से संकेत कर रहे हैं। चुनाव आयोग, यह सब कैसे हो रहा है? इसकी जांच कौन करेगा?”
यह घटना सोशल मीडिया पर भी बहस का विषय बन गई है, जहां यूजर्स इसे “लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने” और “खुलेआम नियमों का उल्लंघन” बता रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि यह तस्वीर खुद ही चुनावी धोखाधड़ी का सबूत है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। इस मामले ने बिहार के पहले चरण के मतदान की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।