तेज प्रताप यादव की पार्टी में मुजफ्फरपुर की ‘ब्यूटी क्वीन’ की एंट्री: मिसेज इंडिया ने थामा JJD का दामन, जानें पूरा बैकग्राउंड…

Ritu Raj

बिहार की सियासत में इन दिनों एक ‘ग्लैमरस’ एंट्री की काफी चर्चा है। मुजफ्फरपुर की रहने वाली और 2017 की मिसेज इंडिया रहीं मोनिका मनी ने तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) का हाथ थाम लिया है।

‘ब्यूटी क्वीन’ से ‘सियासत’ तक का सफर;
मोनिका मनी अब तक फैशन और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुकी थीं, लेकिन अब उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखकर एक नई शुरुआत की है। मुजफ्फरपुर की मूल निवासी मोनिका ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की। साल 2009 में विवाह के बाद उन्होंने अपने परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं। वे तीन बच्चों की मां होने के साथ-साथ एक सफल उद्यमी भी हैं। उनकी उपलब्धियों की बात करें तो सहेलियों के प्रोत्साहन से उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा और वर्ष 2017 में मिसेज इंडिया का खिताब जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई।

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दही-चूड़ा भोज और सियासी दस्तक;
मोनिका पहली बार तब चर्चा में आईं जब मकर संक्रांति पर तेज प्रताप यादव के ‘दही-चूड़ा भोज’ में उन्हें लालू प्रसाद यादव और विजय सिन्हा जैसे दिग्गजों के साथ मंच साझा करते देखा गया। वहीं से उनके JJD में शामिल होने के कयास लगने लगे थे।

JJD को ही क्यों चुना?
मोनिका मनी पहले जदयू (JDU) की समर्थक रही हैं और नीतीश कुमार के शराबबंदी अभियान का हिस्सा भी रह चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने तेज प्रताप यादव की नई पार्टी को चुनना बेहतर समझा। उनका मानना है कि JJD का विजन राष्ट्रीय जनता दल से अलग और अधिक आधुनिक है। साथ ही वे अपने शिक्षा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों को बड़े मंच पर ले जाना चाहती हैं। इसके अलावा, उन्हें तेज प्रताप यादव का नेतृत्व, विजन और पार्टी का उद्देश्य काफी प्रभावित करता है।

तेज प्रताप की नई रणनीति;
तेज प्रताप यादव अपनी पार्टी JJD को अब बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक फैलाने की तैयारी में हैं। 2025 के चुनावों के बाद, वे पार्टी में नए और प्रभावशाली चेहरों को जोड़कर युवा और महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।

क्या वे चुनाव लड़ेंगी?
फिलहाल मोनिका ने चुनाव लड़ने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। उनका कहना है कि अभी उनका ध्यान सामाजिक मुद्दों और पार्टी विस्तार पर है, चुनाव पर फैसला भविष्य की परिस्थितियों के आधार पर होगा।

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