हाल ही में नवजोत कौर सिद्धू ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी “भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी” की घोषणा की, जिससे एक दिलचस्प सवाल फिर चर्चा में आ गया कि क्या भारत में कोई आम नागरिक भी अपनी राजनीतिक पार्टी बना सकता है? इसका जवाब है- जी हां, बिल्कुल बना सकता है। भारत का लोकतांत्रिक ढांचा हर नागरिक को यह अधिकार देता है, बशर्ते वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करे। इस प्रक्रिया की रूपरेखा Representation of the People Act, 1951 के तहत तय की गई है, जो राजनीतिक दलों के गठन और उनके पंजीकरण को नियंत्रित करता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

1) सदस्यों और विचारधारा की जरूरत;
किसी भी राजनीतिक पार्टी की शुरुआत उसके उद्देश्य और लोगों से होती है। पार्टी बनाने के लिए कम से कम 100 सदस्य होना जरूरी है। ये सभी सदस्य भारत के पंजीकृत मतदाता होने चाहिए। इसके साथ ही एक स्पष्ट विचारधारा और लक्ष्य तय करना जरूरी होता है, जो पार्टी की पहचान बनाता है।

2) पार्टी का संविधान तैयार करना;
पार्टी बनाने के लिए एक लिखित संविधान तैयार करना अनिवार्य है। इसमें पार्टी का विजन, संगठनात्मक ढांचा, निर्णय लेने की प्रक्रिया, और नेतृत्व के चुनाव के नियम स्पष्ट रूप से बताए जाते हैं। यह दस्तावेज पार्टी के संचालन की नींव होता है और भविष्य में किसी भी विवाद को सुलझाने में मदद करता है।

3) चुनाव आयोग में आवेदन;
पार्टी के गठन के बाद 30 दिनों के भीतर Election Commission of India के पास पंजीकरण के लिए आवेदन करना होता है। यह कदम पार्टी को कानूनी पहचान दिलाने के लिए बेहद जरूरी है। आवेदन के साथ ₹10,000 का गैर-वापसी योग्य शुल्क भी जमा करना होता है।

4) सार्वजनिक घोषणा (Public Notice);
पंजीकरण से पहले पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पार्टी को अपने नाम की सार्वजनिक घोषणा करनी होती है। इसके तहत कम से कम दो राष्ट्रीय और दो स्थानीय समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित करना पड़ता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन को पार्टी के नाम या गठन पर आपत्ति हो, तो वह समय रहते अपनी शिकायत दर्ज करा सके।

5) जरूरी दस्तावेज जमा करना;
पार्टी को कई जरूरी दस्तावेज भी जमा करने होते हैं, जैसे:
– पार्टी के प्रमुख सदस्यों के शपथ पत्र (कि वे किसी अन्य पार्टी के सदस्य नहीं हैं)
– सभी सदस्यों के मतदाता पहचान पत्र की प्रतियां
– पार्टी का आधिकारिक पता
– बैंक खाते की जानकारी

6) सत्यापन और पंजीकरण;
जब सभी दस्तावेज जमा हो जाते हैं और संभावित आपत्तियों का निपटारा हो जाता है, तब चुनाव आयोग पूरे आवेदन की जांच करता है। यदि सब कुछ सही पाया जाता है, तो पार्टी को आधिकारिक रूप से पंजीकृत कर दिया जाता है। इसके बाद वह एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक इकाई बन जाती है और चुनाव लड़ने के लिए पात्र हो जाती है।