सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजधानी में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ब्यूरो की ट्रैप टीम ने युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के सहायक निदेशक (प्रम) जय सिंह को नियोजन भवन की पार्किंग में रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब अधिकारी अपनी आलीशान कार के भीतर घूस की पहली किस्त ले रहे थे।
पार्किंग में बिछाया गया था ‘ट्रैप’
निगरानी ब्यूरो को शिकायत मिली थी कि एक विशेष विभागीय कार्य के निष्पादन के बदले सहायक निदेशक जय सिंह द्वारा 10 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की मांग की जा रही है। ब्यूरो ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और जैसे ही जय सिंह अपनी कार में 5 लाख रुपये की पहली किस्त स्वीकार की, पहले से मुस्तैद निगरानी की टीम ने उन्हें दबोच लिया।
साहब (निदेशक) के लिए मांगे थे 9 लाख!
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा खुद निगरानी विभाग के डीएसपी पवन कुमार ने किया। उन्होंने बताया कि इस रिश्वतखोरी के पीछे एक बड़ा नेक्सस काम कर रहा है। डीएसपी पवन कुमार के आधिकारिक बयान के अनुसार: “हमें सटीक सूचना मिली थी कि नियोजन भवन की पार्किंग में कार के भीतर पैसे का लेन-देन होगा। आरोपी जय सिंह ने कुल 10 लाख रुपये की मांग की थी, जिसमें से 9 लाख रुपये निदेशक महोदय (साहब) के लिए और 1 लाख रुपये खुद के कमीशन के तौर पर तय किए गए थे। फिलहाल हमने जय सिंह को रंगे हाथों पकड़ा है और अब निदेशक सुनील कुमार वर्मा की भूमिका की भी गहनता से जांच की जाएगी।”
विभाग में मचा हड़कंप, जांच का बढ़ेगा दायरा
इस औचक कार्रवाई के बाद नियोजन भवन और संबंधित विभाग में हड़कंप मच गया है। निगरानी ब्यूरो की टीम ने घूस की रकम को बरामद कर आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर मुख्यालय ले गई है। सूत्रों की मानें तो जांच की आंच विभाग के कई अन्य बड़े अधिकारियों तक पहुँच सकती है। ब्यूरो यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या इससे पहले भी इस तरह के ‘पार्किंग डील्स’ के जरिए फाइलों को आगे बढ़ाया गया है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि रसूखदार पदों पर बैठे भ्रष्ट अधिकारी अब निगरानी की रडार से बच नहीं सकते।