सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीट बंटवारे को लेकर जारी लंबी खींचतान अब समाप्त हो गई है। गठबंधन के सभी घटक दलों के बीच 243 विधानसभा सीटों का फॉर्मूला तय हो गया है, जिसके तहत भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। इस समझौते की आधिकारिक घोषणा भाजपा और जदयू के शीर्ष नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर की, जिसमें गठबंधन की एकता और सौहार्दपूर्ण वातावरण पर जोर दिया गया है।
सीट बंटवारे में लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) (LJP-R) के प्रमुख चिराग पासवान को बड़ी हिस्सेदारी मिली है। वहीं, छोटे सहयोगी दल हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेक्युलर) [HAM(S)] के जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के उपेंद्र कुशवाहा को भी पर्याप्त सीटें देकर संतुष्ट किया गया है।
NDA में सीटों का अंतिम गणित
गठबंधन के नेताओं द्वारा साझा किए गए अंतिम फॉर्मूले के तहत, सीटों का वितरण निम्नलिखित प्रकार से किया गया है:
पार्टी आवंटित सीटें
यह वितरण सुनिश्चित करता है कि NDA के सभी पांच घटक दल इस बार मजबूती और तालमेल के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे।
| जदयू (JDU) | 101 |
| भाजपा (BJP) | 101 |
| लोजपा (राम विलास) (LJP-R) | 29 |
| राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) | 06 |
| हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) | 06 |
नेताओं ने ‘हर्षपूर्वक’ किया स्वागत
सीट बंटवारे की जानकारी सबसे पहले भाजपा के नेता और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके दी। दोनों नेताओं ने अपने पोस्ट में लिखा कि “हम NDA के साथियों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में सीटों का वितरण पूर्ण किया है।”

जदयू नेता संजय झा ने घोषणा के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रचंड बहुमत से फिर से मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प दोहराया। वहीं, जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने भी खुशी जाहिर करते हुए इस समझौते का स्वागत किया। यह एकमत घोषणा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि गठबंधन में अब आंतरिक मतभेद खत्म हो गए हैं और सभी दल एकजुट होकर चुनाव प्रचार में उतरने के लिए तैयार हैं।
राजनीतिक संतुलन और बलिदान
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस सीट बंटवारे में जदयू को सबसे अधिक 14 सीटें छोड़नी पड़ी हैं, जो उन्होंने पिछले चुनावों में जीती थीं। भाजपा ने भी नौ सीटें छोड़ी हैं। जदयू द्वारा इतना बड़ा बलिदान देना यह दर्शाता है कि गठबंधन के भीतर छोटे सहयोगी दलों, विशेष रूप से चिराग पासवान की बढ़ती राजनीतिक ताकत को स्वीकार किया गया है। LJP (R) को मिली 29 सीटें, चिराग पासवान को एक मजबूत राजनीतिक कद प्रदान करती हैं।
यह समझौता एनडीए की आंतरिक स्थिरता को सुनिश्चित करता है, जो अब महागठबंधन (INDIA Alliance) के आंतरिक सीट बंटवारे के विवादों के बीच एक मजबूत और संगठित चुनावी चेहरा पेश करने में सक्षम होगा। अब जबकि सीटों का फॉर्मूला फाइनल हो चुका है, NDA के सभी दल अब उम्मीदवारों के नामों की सूची को अंतिम रूप देने और पहले चरण के मतदान (6 नवंबर) से पहले नामांकन प्रक्रिया (17 अक्टूबर) को पूरा करने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करेंगे। “बिहार है तैयार, फिर से एनडीए सरकार।” के नारे के साथ अब राज्य में चुनावी हलचल तेज हो जाएगी।