मुजफ्फरपुर लूट-हत्या मामले में 5 आरोपियों को आजीवन कारावास, अदालत ने सुनाई सजा और जुर्माना

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की एक विशेष अदालत ने करीब 17 महीने पुराने चर्चित शिवजी राम हत्याकांड में अपना फैसला सुना दिया है। विशेष एससी-एसटी न्यायाधीश अजय कुमार मल्ल की अदालत ने लूट और हत्या के इस जघन्य मामले में संलिप्त पांचों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, न्याय की मर्यादा को सुदृढ़ करते हुए कोर्ट ने प्रत्येक दोषी पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

क्या था पूरा मामला?
यह हृदयविदारक घटना सकरा थाना क्षेत्र की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सजा पाने वाले दोषियों की पहचान रौशन कुमार, राकेश भगत उर्फ केशव, दिनेश महतो, रमेश महतो उर्फ मास्टर और एक अन्य रौशन कुमार (सभी निवासी मीरापुर) के रूप में हुई है। इन सभी ने मिलकर लूट के इरादे से एक महादलित व्यक्ति, शिवजी राम की बेरहमी से हत्या कर दी थी।

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घटना 16 मई 2024 की है, जब शिवजी राम मोहनपुर हाट से सब्जी और मवेशियों का दाना खरीदने गए थे। उनके पास अनाज बिक्री के लगभग एक लाख रुपये थे। बाजार में लेनदेन के दौरान अपराधियों की नजर उन पर पड़ गई। उसी शाम घर लौटने के बाद, उन्हें एक अज्ञात फोन आया और वे बिना किसी को बताए घर से निकल गए। अगले दिन, 17 मई को जहांगीरपुर बनकटवा पुल के पास झाड़ियों में उनका शव बरामद हुआ। अपराधियों ने न केवल उनके पैसे और बाइक लूटी, बल्कि क्रूरता दिखाते हुए उनके शव को बाइक से बांधकर घसीटा भी था।

साक्ष्यों ने निभाई अहम भूमिका
विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पीपी) जयमंगल प्रसाद ने अदालत में कुल आठ गवाहों को पेश किया। इस मामले में पुलिस की वैज्ञानिक जांच और घटनास्थल से बरामद अपराधियों के ‘गमछे’ ने निर्णायक साक्ष्य के रूप में काम किया। पुलिस ने पिछले साल 22 सितंबर को आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।

न्याय की जीत
अदालत के इस फैसले का क्षेत्र में स्वागत किया जा रहा है। पीड़ित परिवार, विशेषकर मृतक की पत्नी महेश्वरी देवी ने इसे न्याय की जीत बताया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी। 17 महीने के भीतर आए इस फैसले ने न्यायिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को और मजबूत किया है।

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