नीतीश की सीट पर निशांत! बिहार विधान परिषद चुनाव में इन 12 सीटों के लिए मचेगा घमासान, देखें समीकरण…

Ritu Raj

बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव के बाद अब सबकी नजरें विधान परिषद की खाली हो रही सीटों पर हैं। महागठबंधन के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण दिख रहा है, जबकि NDA अपनी स्थिति मजबूत करने की तैयारी में है। 5 मुख्य बिंदु में यहाँ समझिए 12 सीटों के चुनाव का पूरा समीकरण।

1) खाली सीटों का गणित और समय;
जून 2026 तक विधान परिषद की कुल 12 सीटें चर्चा में हैं। इनमें से 9 सीटों पर कार्यकाल पूरा हो रहा है (राजद-2, जदयू-3, भाजपा-1, कांग्रेस-1 और 2 पहले से खाली)। इसके अतिरिक्त, विधानसभा कोटे की 2 सीटों (नीतीश कुमार और मंगल पांडेय के इस्तीफे से खाली) और स्थानीय प्राधिकार की 1 सीट (राधा चरण सेठ) पर उपचुनाव होने हैं। माना जा रहा है कि अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में चुनावी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

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2) जीत का फार्मूला और महागठबंधन को झटका;
विधान परिषद की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, महागठबंधन के पास केवल 41 विधायक हैं। इस संख्या बल के साथ वे केवल 1 सीट सुरक्षित रूप से जीत सकते हैं, जबकि उनके पास अभी 3 सीटें हैं। ऐसे में महागठबंधन को 2 सीटों का नुकसान होना लगभग तय है।

3) NDA को बढ़त: जदयू और भाजपा का समीकरण;
एनडीए इस चुनाव में फायदे में दिख रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सीट समेत जदयू के खाते में 4 सीटें जाने की संभावना है। चर्चा है कि नीतीश कुमार की खाली सीट पर उनके बेटे निशांत कुमार को सदन भेजा जा सकता है। वहीं, भाजपा के पास अपने 3 सदस्यों को जिताने के बाद भी अतिरिक्त वोट बचेंगे। भाजपा मंगल पांडेय की जगह उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को समर्थन दे सकती है, जो फिलहाल सरकार में मंत्री हैं।

4) क्या चिराग पासवान का खुलेगा खाता?
लोकसभा और राज्यसभा चुनाव में एनडीए का साथ देने के बाद अब LJP (रामविलास) विधान परिषद में अपनी हिस्सेदारी मांग रही है। चिराग की पार्टी के पास 19 विधायक हैं और जीत के लिए 6 और वोटों की आवश्यकता है। यदि भाजपा अपने कोटे के अतिरिक्त 10 वोट चिराग की पार्टी को ट्रांसफर करती है, तो सदन में पहली बार लोजपा (आर) का खाता खुल सकता है।

5) नए चेहरों पर दांव और संभावित नाम;
इस बार सभी दल युवाओं और नए चेहरों को तरजीह दे सकते हैं। भाजपा और जदयू से संजय मयूख और गुलाम गौस जैसे दिग्गजों की जगह नए नामों पर विचार हो सकता है। वहीं, राजद से सुनील सिंह का दोबारा सदन जाना तय माना जा रहा है। राधा चरण सेठ की खाली सीट पर उनके बेटे या व्यवसायी अजय सिंह के बीच दावेदारी की रेस है।

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