सोशल मीडिया और बच्चों की सुरक्षा आज एक वैश्विक बहस का मुद्दा बन चुकी है। डिजिटल दुनिया के खतरों को देखते हुए कई देशों ने कड़े कानून बनाए हैं, और भारत भी अब इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। दुनियाभर की सरकारें अब ‘डिजिटल सेफ्टी’ को लेकर गंभीर हैं। कई देशों ने उम्र की सख्त सीमा तय कर दी है ताकि बच्चों को मानसिक तनाव और साइबर खतरों से बचाया जा सके।
प्रमुख देशों के कड़े कदम;
| देश | उम्र की सीमा | वर्तमान स्थिति |
| ऑस्ट्रेलिया | 16 साल | पूर्ण प्रतिबंध (दिसंबर 2025 से लागू)। कंपनियों पर भारी जुर्माने का प्रावधान। |
| फ्रांस | 15 साल | माता-पिता की सहमति अनिवार्य। राष्ट्रपति मैक्रों डिजिटल सुरक्षा के सबसे बड़े पैरोकार हैं। |
| डेनमार्क | 15 साल | सोशल मीडिया एक्सेस पर पूरी तरह रोक। |
| नॉर्वे | 15 साल | उम्र सीमा को बढ़ाकर 15 करने का प्रस्ताव पाइपलाइन में है। |
| स्पेन | 16 साल | प्रतिबंध लगाने की कानूनी प्रक्रिया जारी है। |
भारत की स्थिति: क्या हम बड़े बदलाव की ओर हैं?
1) नियमों में सख्ती का प्रस्ताव:
– भारत सरकार अब न्यूनतम उम्र को 13 से बढ़ाकर 16 साल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके लिए सोशल मीडिया कंपनियों के साथ लगातार बातचीत का दौर जारी है।
2) डेटा सुरक्षा और सहमति:
– ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट’ (DPDP) के तहत अब नाबालिगों के डेटा को प्रोसेस करने के लिए माता-पिता की अनुमति को अनिवार्य बनाया गया है। यह कानून बच्चों की प्राइवेसी के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करता है।
3) ‘एडिक्टिव डिजाइन’ पर प्रहार:
सरकार केवल उम्र नहीं, बल्कि ऐप के इस्तेमाल के तरीके को भी बदलना चाहती है। इसमें दो प्रमुख बदलावों पर चर्चा हो रही है:
4) उम्र का वेरिफिकेशन: केवल जन्मतिथि डाल देना काफी नहीं होगा, इसे सख्त तरीके से जांचा जाएगा।
5) फीचर्स पर लगाम: अंतहीन स्क्रॉलिंग (Endless Scrolling) और ऐसे एल्गोरिदम जो बच्चों को ऐप से चिपकाए रखते हैं, उन्हें सीमित किया जा सकता है।