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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से सभी आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश दिए हैं। WHO का आंकड़ा काफी चौकाने वाला है, जिसे आप जानकर हैरान हो जाएंगे। कोर्ट के इस आदेश का एनिमल एक्टिविस्ट ने जमकर विरोध जताया है। आइए जानते हैं स्ट्रे डॉग्स से दुनियाभर के बाकी देश कैसे निपटते हैं।
दरअसल, 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद जैसे दिल्ली-NCR में आने वाले इलाकों पर लागू किए हैं। आदेश के दौरान कोर्ट ने कहा- हर शेल्टर में कम से कम 5,000 कुत्तों को रखने की क्षमता होनी चाहिए। साथ ही वहां कुत्तों की नसबंदी और उनके वैक्सीनेशन की सुविधा और सीसीटीवी कैमरे भी होने चाहिए। वहीं, कुत्तों की नसबंदी के बाद सड़कों पर वापस नहीं छोड़ा जाए। और अगर कोई व्यक्ति या संगठन इस कार्रवाई में रुकावट बनता है, तो सुप्रीम कोर्ट उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट को यह आदेश विश्व स्वास्थ्य संगठन के चौंकाने वाले आंकड़े के कारण करना पड़ा। इनके मुताबिक दुनिया में हर साल 55 हजार से ज्यादा लोगों की मौत रेबीज से होती है। जिनमें से हर तीसरा यानी करीब 18 से 20 हजार मौतें भारत में होती हैं। भारत में डॉगबाइट से मरने वाले आधे से ज्यादा 15 साल से कम उम्र के बच्चे हैं। वैसे यह मुद्दा इसी साल अप्रैल में केंद्रीय पशुपालन मंत्री एसपी सिंह बघेल ने लोकसभा में उठाया था।
दुनिया के बाकी देश आवारा कुत्तों से कैसे निपटारा करते है:-
अमेरिका- यहां आवारा जानवरों को कानूनी सुरक्षा दी गई है, ताकि उनके साथ बुरा बर्ताव न हो।
न्यूयॉर्क- यहां आवारा कुत्तों के लिए एनिमल केयर सेंटर्स नाम का एक NGO कुत्तों को शेल्टर्स में ले जाता है। यहां कुत्तों को वापस सड़क पर नहीं छोड़ते।
ब्रिटेन- यहां पर लोकल एडमिनिस्ट्रेशन आवारा कुत्तों का मैनेजमेंट देखता है। साल 2023-24 में करीब 36 हजार कुत्तों के लिए शेल्टर की व्यवस्था की गई।
लंदन- लंदन में लोकल एडमिनिस्ट्रेशन डॉग वॉर्डन सर्विस देता है। यहां के कानून के मुताबिक, 2 महीने से ज्यादा उम्र के कुत्तों पर एक माइक्रोचिप लगी होती है, जिसमें कुत्ते के मालिक का नंबर और बाकी जानकारी होती है। इसके अलावा प्रशासन आवारा जानवरों के लिए मालिक ढूंढता है, नहीं मिलने पर अपने पास रख सकता है या मार भी सकता है।
सिंगापुर- यहां पर एक सरकारी संस्था आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी और वैक्सीनेशन करती है। हालांकि यहां भी कुत्तों में एक माइक्रोचिप लगाई जाती है।
जापान- जापान में एक सख्त एनिमल वेलफेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जो आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर्स भेजता है। वहीं, प्रशासन को बीमार और खतरनाक जानवरों को मारने का अधिकार भी है।