बिहार विधानमंडल के बजट सत्र का छठा दिन आज काफी हंगामेदार रहा। सदन में विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद वे वॉकआउट कर गए। इसके बाद विधानसभा परिसर में मीडिया के सामने विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखे हमले बोले।
मुख्य विवाद विधान परिषद में हुई घटना से जुड़ा है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के बीच कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और हाल की आपराधिक घटनाओं (जैसे दरभंगा रेप-मर्डर केस) को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष का आरोप है कि नीतीश कुमार ने राबड़ी देवी को “ई जो लड़की है…” जैसे शब्दों से संबोधित कर अपमान किया, जो महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। विपक्षी नेता भाई वीरेंद्र ने मीडिया से कहा कि मुख्यमंत्री का यह व्यवहार निंदनीय है और माफी मांगने लायक नहीं। उन्होंने नीतीश कुमार पर व्यक्तिगत हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें अपना इलाज करवाना चाहिए, वे बीमार हैं और सदन में आने से पहले दवाई ले लें। भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि मुख्यमंत्री मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और उन्हें दोनों सदनों में अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए। साथ ही उन्होंने राज्य में बढ़ते अपराध, खासकर महिलाओं के खिलाफ घटनाओं और सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए।
राजद नेता आलोक मेहता ने भी इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के साथ ऐसी भाषा का इस्तेमाल शर्मनाक है और सदन की गरिमा के खिलाफ। सरकार सुशासन और जीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा पर पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को सदन में बोलने का मौका नहीं दिया गया, इसलिए विरोध में वॉकआउट किया गया। माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस व्यवहार से गलत संदेश जा रहा है, जिससे अपराधियों का हौसला बढ़ रहा है। राज्य में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही। विपक्ष ने इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा, लेकिन जब बात नहीं सुनी गई तो सदन छोड़ दिया। विपक्षी दल एकजुट होकर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही मांगते रहेंगे। यह घटना बिहार की सियासत में नई बहस छेड़ गई है, जहां नीतीश सरकार पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने का आरोप लग रहा है, जबकि सत्ता पक्ष विपक्ष के हंगामे को बेकार बता रहा है।