वक्फ बिल के खिलाफ मुख्यमंत्री नितीश कुमार और अन्य नेताओं का बढ़ा विरोध

Rahul
By Rahul

सिटी पोस्ट लाइव

पटना/नई दिल्ली। 1 अप्रैल को आयोजित एक प्रेस वार्ता में वक्फ बिल को लेकर गंभीर राजनीतिक बयान सामने आए। इस अवसर पर वक्फ मामलों के जानकार अनीसूर रहमान और पूर्व सांसद अशफाक करीम ने भारतीय सरकार से वक्फ बिल को वापस लेने की अपील की। उनके अनुसार, इस बिल में कई खामियां हैं, जो समाज में विभाजन और वक्फ संपत्तियों के गलत उपयोग को बढ़ावा देंगी। वक्फ बिल का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना बताया गया है, लेकिन इस पर तर्क और आलोचनाएं भी तेज हो गई हैं।

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बिल में बदलाव से भ-माफिया को लाभ : अनीसूर रहमान

प्रेस वार्ता में अनीसूर रहमान ने वक्फ बिल की गंभीर खामियों पर जोर देते हुए कहा कि भारत सरकार ने 2 अप्रैल को वक्फ बिल पेश करने का ऐलान किया था, लेकिन इस बिल में किए गए बदलाव से वक्फ संपत्तियों के असल उद्देश्य को नुकसान होगा। उनका कहना था कि इस बिल में बदलाव से भूमि माफिया को लाभ होगा, और यह वक्फ संपत्तियों को नुकसान पहुंचाएगा।

“कानून में किए गए बदलाव के बाद, यदि किसी के पास 12 साल से कोई जमीन कब्जे में है, तो उस जमीन के अधिकारों को वैध माना जाएगा, चाहे वह भूमि अवैध तरीके से कब्जाई गई हो,” रहमान ने कहा। उन्होंने इसे एक गंभीर साजिश बताया और कहा कि सरकार की मंशा वक्फ संस्थानों को खत्म करना है। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार और लोजपा नेता चिराग पासवान से भी अपील की कि वे इस बिल का समर्थन न करें।

रहमान ने यह भी कहा कि वक्फ संपत्तियों के मामले पहले 1995 और 2013 के कानून के तहत ट्रिब्यूनल में सुने जाते थे, लेकिन इस बिल में बदलाव के बाद इन मामलों को अलग तरीके से निपटाने का प्रयास किया जा रहा है, जो वक्फ समुदाय के लिए खतरनाक हो सकता है। उनका कहना था कि “यह बिल मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है।”

कई समस्याएं हो सकती हैं पैदा : अशफाक करीम

पूर्व सांसद अशफाक करीम ने भी इस बिल को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि वक्फ बिल के जरिए वक्फ संपत्तियों के नियंत्रण में बदलाव से कई धार्मिक और सामाजिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उनका कहना था कि कई डेलिगेशनों ने बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार से मुलाकात की थी, और वे सभी इस बिल का विरोध कर रहे थे।

“मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताई थी। वह इस पर फैसला करेंगे कि क्या इस बिल का समर्थन करना चाहिए या नहीं।” करीम ने यह भी कहा कि अगर यह बिल पास होता है तो वह इस बात का पूरा ध्यान रखेंगे कि मुस्लिम समुदाय को कोई नुकसान न हो।

अमित शाह से मिले ललन सिंह और संजय झा

इस बीच, वक्फ बिल को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मच गई है। बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार पर इस बिल का समर्थन या विरोध करने को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। जदयू नेता ललन सिंह और संजय झा की अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद यह स्पष्ट हुआ कि नितीश कुमार इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने वाले हैं। “नितीश कुमार को इस बिल पर फैसला लेना है कि वे इसका समर्थन करेंगे या नहीं। यह उनका व्यक्तिगत और पार्टी का निर्णय होगा,” ललन सिंह ने कहा।

ईमारते शरिया ने बिल को बताया मुस्लिम विराधी

वक्फ बिल के विरोध में कई राजनीतिक पार्टियां और धार्मिक संस्थाएं सामने आ चुकी हैं। वक्फ बिल के समर्थन में या विरोध में राजनीतिक समीकरण अब तेजी से बदलते दिख रहे हैं। इसी बीच, ईमारते शरिया ने भी इस बिल के विरोध में आवाज उठाई है, और इसे मुस्लिम समाज के खिलाफ एक बड़ा कदम बताया है। भारत सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग तेज हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बिल यदि पारित होता है, तो इसका असर सिर्फ वक्फ संपत्तियों पर ही नहीं, बल्कि भारत के समाजिक ताने-बाने पर भी पड़ेगा। वक्फ बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक चर्चाएं अब हर स्तर पर तेज हो गई हैं। धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक खेमों में इसे लेकर तीव्र विवाद हो सकता है, जिससे आगामी दिनों में भारत सरकार को इस पर पुनर्विचार करने की जरूरत महसूस हो सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या वक्फ बिल को वापस लिया जाता है या फिर इसे संसद में पारित किया जाता है।

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