फिलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब की कहानी पर आधारित ऑस्कर-नॉमिनेटेड फिल्म द वॉइस ऑफ हिंद रजब की भारत में रिलीज फिलहाल रुकी हुई है। फिल्म को अब तक सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला है। फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर मनोज नंदवाना के अनुसार, फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास भेजा गया था। बोर्ड ने फिल्म में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं पाई, लेकिन इसे “संवेदनशील” माना गया। फिल्म की स्क्रीनिंग फरवरी के आखिरी हफ्ते में हुई थी।

नंदवाना ने बताया कि फिल्म में न तो हिंसा है, न अश्लील दृश्य हैं और न ही कोई राजनीतिक संवाद है। बावजूद इसके, भारत-इजराइल संबंधों को ध्यान में रखते हुए इसे मंजूरी नहीं दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि आमतौर पर सेंसर प्रक्रिया में कट्स या बदलाव सुझाए जाते हैं, लेकिन इस फिल्म के मामले में ऐसा नहीं हुआ। फिलहाल, फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजा गया है। नंदवाना ने कहा कि कमेटी कब गठित होगी, इसकी कोई निश्चित जानकारी नहीं है और तब तक फिल्म “पुरानी” हो सकती है।

बता दें कि इस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का है। फिल्म ट्यूनीशियाई फिल्ममेकर काउथर बेन हानिया द्वारा बनाई गई है और इसमें हिंद रजब की सच्ची कहानी दिखाई गई है। जनवरी 2024 में गाजा सिटी से भागते समय हिंद रजब की कार पर हमला हुआ था। फिल्म में कहानी रेड क्रिसेंट के वालंटियर्स के दृष्टिकोण से दिखाई गई है और इसमें हिंद रजब की असली आवाज़ का इस्तेमाल किया गया है। 12 दिन बाद उसका शव उसके परिवार और दो वालंटियर्स के साथ मिला था।

फिल्म का प्रीमियर सितंबर 2025 में वेनीस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जहां इसे ग्रैंड ज्यूरी प्राइज से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, फिल्म को टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाया गया। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब किसी फिल्म को भारत में सेंसर सर्टिफिकेट में परेशानी आई हो। 2024 की फिल्म संतोष को भी सर्टिफिकेट नहीं मिलने के कारण रिलीज़ नहीं किया जा सका।