पप्पू यादव की ‘शादी वाली’ राजनीति और 67% आरक्षण की मांग, गिरिराज सिंह के साथ जुबानी जंग तेज

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की सियासत में इन दिनों बयानों के तीखे बाणों ने सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने एक ऐसा राजनीतिक दांव चला है, जिसने राज्य में सामाजिक समरसता, जातिगत समीकरण और आरक्षण की बहस को नए सिरे से हवा दे दी है। पप्पू यादव ने खुले मंच से समाज की परंपरागत दीवारों को ढहाने के लिए एक बड़ा आह्वान किया है।

सामाजिक दीवारें तोड़ने का आह्वान: राजपूत-भूमिहार से दलितों तक शादी की अपील
पप्पू यादव ने समाज के सभी वर्गों, विशेषकर राजपूत, भूमिहार, यादव, लाला, कोइरी, कुर्मी और दलित समाज के युवाओं से आपस में विवाह करने की अपील की है। उनका तर्क है कि जब तक शादियों के जरिए सामाजिक दीवारें नहीं टूटेंगी, तब तक समाज में पूर्ण समानता का सपना अधूरा रहेगा। जहां उनके समर्थक इसे ‘क्रांतिकारी कदम’ बता रहे हैं, वहीं आलोचकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने उन पर तंज कसते हुए कहा है कि “राजनीति करने के बजाय उन्हें इस बदलाव की शुरुआत अपने घर से करनी चाहिए।”

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आरक्षण का नया कार्ड: 67 फीसदी का दावा
सिर्फ सामाजिक मुद्दों ही नहीं, पप्पू यादव ने आरक्षण के मोर्चे पर भी सरकार को घेर लिया है। उन्होंने मांग की है कि एससी/एसटी के लिए 27 फीसदी और ईबीसी के लिए 17 फीसदी को समाहित करते हुए कुल आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 67 फीसदी कर दिया जाना चाहिए। यह मांग आने वाले समय में बिहार की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर वोट बैंक की राजनीति को प्रभावित करती है।

गिरिराज सिंह बनाम पप्पू यादव: बयानों की मर्यादा तार-तार
इस वैचारिक बहस के बीच, पप्पू यादव और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के बीच की व्यक्तिगत अदावत भी चरम पर है। गिरिराज सिंह द्वारा बेगूसराय में दिए गए “सूअर पालन और शास्त्र-शस्त्र पूजा” वाले बयान पर पलटवार करते हुए पप्पू यादव ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर गिरिराज सिंह की तुलना “सूअर” से कर दी, जिससे राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।

गौरतलब है कि गिरिराज सिंह ने अपने भाषण में कहा था कि जहां सूअर रहेगा, वहां “खास तरह के लोग” नहीं आएंगे। इस जुबानी जंग ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति अब विकास के मुद्दों से हटकर व्यक्तिगत आक्षेपों और जातिगत ध्रुवीकरण की ओर मुड़ रही है।

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