पटना : रॉन्ग साइड से आ रही DSP की गाड़ी ने मारी टक्कर, हंगामा बढ़ा तो अफसर मौके से हुए रफूचक्कर

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर उस वक्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब कानून का पालन कराने वाले एक पुलिस अधिकारी पर ही कानून तोड़ने और अराजकता फैलाने का गंभीर आरोप लगा। मामला शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक बेली रोड स्थित हड़ताली मोड़ का है, जहाँ एक डीएसपी (DySP) की सरकारी गाड़ी ने गलत दिशा (रॉन्ग साइड) से आकर दूसरी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे के बाद मौके पर मौजूद जनता का गुस्सा फूट पड़ा और घंटों सड़क पर बवाल होता रहा।

नियमों की धज्जियां और तेज रफ्तार का कहर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना उस समय हुई जब वीआईपी मूवमेंट वाले बेली रोड पर एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो, जिस पर पुलिस का बोर्ड लगा था, नियमों को ताक पर रखकर गलत दिशा से आ रही थी। हड़ताली मोड़ के समीप अचानक सामने से आ रहे एक वाहन से इसकी सीधी भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहनों को नुकसान पहुँचा और सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन इस लापरवाही ने आम जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया।

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साहब उतरे और निकल भागे!
हादसे के तुरंत बाद गाड़ी में सवार डीएसपी नीचे उतरे। लोगों को उम्मीद थी कि वह नुकसान का जायजा लेंगे या अपनी गलती स्वीकार करेंगे, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि जैसे ही भीड़ जुटना शुरू हुई और लोगों ने सवाल पूछने शुरू किए, साहब अपनी रसूखदार वर्दी का रौब दिखाने के बजाय चुपके से मौके से खिसक लिए। अधिकारी का इस तरह घटनास्थल से भागना आग में घी डालने जैसा साबित हुआ। गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर दी और नारेबाजी शुरू कर दी।

जनता का सवाल: “क्या कानून सिर्फ आम आदमी के लिए है?”
सड़क पर मचे बवाल के दौरान लोगों का एक ही तर्क था कि जब आम आदमी हेलमेट न पहनने या सिग्नल तोड़ने पर भारी जुर्माना भरता है, तो एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी रॉन्ग साइड गाड़ी चलाकर दूसरों की जान जोखिम में कैसे डाल सकता है? मौके पर पहुँची स्थानीय पुलिस को भीड़ को समझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने काफी देर बाद यातायात बहाल कराया, लेकिन आरोपी अधिकारी की पहचान और उन पर कार्रवाई को लेकर संशय बरकरार है।

प्रशासन की चुप्पी और उठते सवाल
फिलहाल इस मामले में पटना पुलिस के आला अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह घटना विभाग की छवि पर गहरा दाग लगाती है और सवाल खड़ा करती है कि क्या वर्दी और पद का रसूख ट्रैफिक नियमों से ऊपर है? शहर के बुद्धिजीवी और आम नागरिक अब निष्पक्ष जांच और आरोपी डीएसपी पर सख्त विभागीय कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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