नीतीश खोल रहे हैं खजाना, मगर ताबड़तोड़ गोलियां: क्या अपराध एनडीए की उम्मीदों पर घोंप रहा छुरा?

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक तरफ लगातार बड़े फैसले लेकर राज्य का खजाना खोल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पटना सहित बिहार के कई इलाकों में बढ़ रही आपराधिक घटनाएं उनके ‘सुशासन’ मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। यह विरोधाभास सीधे तौर पर एनडीए की 2025 में सत्ता में वापसी की उम्मीदों पर असर डाल रहा है।

चुनावी मोड में नीतीश कुमार

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरी तरह से चुनाव मोड में आ चुके हैं। हाल के दिनों में उन्होंने ऐसे कई फैसले लिए हैं जो बीते कई सालों में नहीं लिए गए थे। हर वर्ग को साधने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी कई बड़ी योजनाओं और घोषणाओं को लागू किया जा रहा है। इन फैसलों के पीछे उनका मकसद साफ है कि जनता को यह विश्वास दिलाया जाए कि बिहार विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और सत्ता में वापसी का मौका उन्हीं को मिलना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विकास का यह एजेंडा ही उनके लिए सबसे बड़ा हथियार है, लेकिन विपक्ष के पास एक ऐसा मुद्दा है जो इन तमाम फैसलों पर भारी पड़ सकता है: कानून-व्यवस्था।

अपराध का बढ़ता ग्राफ

बिहार में पिछले कुछ समय से अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राजधानी पटना में पिछले दो-तीन महीनों में हुई तीन-चार हाई-प्रोफाइल हत्याओं ने बिहार पुलिस की पोल खोल दी है। पटना की सड़कों पर दिनदहाड़े गोलियां चलना अब आम बात हो गई है। हाल ही में एक राजद से जुड़े कारोबारी राजकुमार राय की हत्या इसका ताजा उदाहरण है। यह सब तब हो रहा है जब नीतीश कुमार अपनी राजनीति की नींव ही ‘सुशासन’ के नाम पर रखते आए हैं। यह अपराध ही वह छुपा हुआ दुश्मन है जो एनडीए के चुनावी अरमानों पर सीधा असर डाल रहा है।

तेजस्वी के लिए बड़ा मौका

विपक्षी नेता तेजस्वी यादव इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। अपने हर भाषण में वह यह बात दोहरा रहे हैं कि नीतीश कुमार चाहे जितने भी जतन कर लें, लेकिन जनता अब उनके सुशासन मॉडल की सच्चाई जान चुकी है। वह आरोप लगा रहे हैं कि नीतीश कुमार ने जनता से वादा तो सुशासन का किया था, लेकिन हकीकत में स्थिति कुछ और ही है। विपक्षी दल पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं, जो अपराधियों को रोकने में विफल साबित हो रही है।

ऐसे में, यह कहा जा सकता है कि नीतीश कुमार ने बिहार में कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं, लेकिन अपराध की बढ़ती घटनाओं ने इन सभी उपलब्धियों को धूमिल कर दिया है। अगर एनडीए ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया तो राजद इसे बिहार चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बना सकती है, जो तेजस्वी यादव के लिए एक बड़ा मौका साबित होगा।

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