सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में शराबबंदी कानून के सख्त प्रावधानों और संपत्ति जब्ती के डर के बीच पटना हाई कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और स्पष्ट फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि किसी के परिसर या खाली जमीन से शराब बरामद होने मात्र से ही उस संपत्ति को सील या जब्त नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह और न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने इस फैसले के जरिए उन लोगों को बड़ी सुरक्षा दी है, जिन्हें रंजिश के तहत फंसाने के लिए उनके घर या जमीन पर अवैध शराब रखवा दी जाती थी।
क्या है कोर्ट का आदेश?
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब्ती की कठोर कार्रवाई तभी की जा सकती है जब यह साबित हो जाए कि अवैध शराब के भंडारण में परिसर के मालिक की ‘प्रत्यक्ष संलिप्तता’ या उसकी मिलीभगत थी। कोर्ट ने कहा कि किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा चोरी-छिपे शराब रख देने के मामले में संपत्ति के मालिक को सजा नहीं दी जा सकती।
नवादा का वह मामला, जिसने बदला नजरिया
यह मामला नवादा के दयामंती देवी की याचिका से जुड़ा था (कांड संख्या 873/2024)। पुलिस ने दयामंती देवी की घेराबंदी वाली खाली जमीन पर कचरे के ढेर में छिपी 2.625 लीटर शराब बरामद की थी। पुलिस ने इसके आधार पर जमीन को सील कर जब्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जबकि दयामंती देवी इस मामले में नामजद आरोपी भी नहीं थीं। उनके अधिवक्ता दीपक कुमार ने दलील दी कि पकड़े गए आरोपियों से याचिकाकर्ता का कोई संबंध नहीं है। कोर्ट ने इन दलीलों को सही माना और जब्ती की कार्यवाही को तुरंत रद्द करने का आदेश दिया।
वाहन जब्ती पर भी रह चुकी है सख्ती कम
गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2025 में भी कोर्ट ने वाहन जब्ती को लेकर स्थिति स्पष्ट की थी। तब अदालत ने कहा था कि यदि शराब व्यक्ति के हाथ में है और वह गाड़ी में बैठा है, तो गाड़ी को तब तक जब्त नहीं किया जाएगा जब तक यह साबित न हो कि गाड़ी का इस्तेमाल विशेष रूप से शराब तस्करी के लिए किया जा रहा था।
आम जनता के लिए क्यों है यह राहत?
बिहार में शराबबंदी कानून के तहत अब तक हजारों घर और गाड़ियाँ जब्त की जा चुकी हैं। अक्सर पड़ोसी या दुश्मन पुरानी रंजिश निकालने के लिए किसी के आंगन या खाली जमीन पर शराब की बोतलें फेंक कर पुलिस को सूचना दे देते थे। हाई कोर्ट का यह ताजा फैसला ऐसे निर्दोष लोगों के लिए सुरक्षा कवच साबित होगा।