जनता बेहाल, सांसद मालामाल: डेढ़ साल बीते पर इन 6 दिग्गजों को नहीं सूझी विकास की एक भी योजना, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा!..

Ritu Raj

बिहार की राजनीति में विकास के बड़े-बड़े दावों और धरातल की हकीकत के बीच एक बड़ी खाई नजर आ रही है। 18वीं लोकसभा चुनाव के डेढ़ साल बाद भी बिहार के कई दिग्गज सांसद अपने संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए मिलने वाले MPLADS (सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना) फंड को खर्च करने में फिसड्डी साबित हुए हैं। वहीं, सरकारी आंकड़ों (6 जनवरी 2026 तक) के आधार पर तैयार यह रिपोर्ट बिहार के माननीय सांसदों के रिपोर्ट कार्ड को दर्शाती है।

‘शून्य’ प्रदर्शन: दिग्गज नेता भी लिस्ट में शामिल;
हैरानी की बात यह है कि इस सूची में कई कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री शामिल हैं, जिन्होंने पिछले दो वर्षों में विकास कार्यों के लिए एक रुपया भी खर्च नहीं किया और न ही कोई प्रस्ताव दिया है।
– ललन सिंह (JDU): मुंगेर सांसद और केंद्रीय मंत्री।
– मीसा भारती (RJD): पाटलिपुत्र सांसद और लालू यादव की बेटी।
– शांभवी चौधरी (LJP-R): समस्तीपुर सांसद और देश की सबसे युवा सांसद।
– राजीव प्रताप रूडी (BJP): सारण सांसद।
– संजय जायसवाल (BJP): पश्चिम चंपारण सांसद। और विवेक ठाकुर(BJP): नवादा।
नोट: इन सांसदों ने अब तक न तो कोई फंड खर्च किया है और न ही विकास की किसी योजना का प्रस्ताव (Recommendation) दिया है।

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‘परफॉर्मर’ सांसद: विकास की दौड़ में सबसे आगे;
जहां कुछ सांसद सुस्त हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने फंड का भरपूर इस्तेमाल किया है। बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह विकास योजनाओं के प्रस्ताव देने में सबसे आगे रहे हैं। वहीं, ₹9 करोड़ से अधिक के प्रस्ताव देने वाले प्रमुख सांसद में राधा मोहन सिंह (पूर्वी चंपारण), जीतन राम मांझी (गया), मनोज कुमार (सासाराम), सुदामा प्रसाद (आरा), और मो. जावेद (किशनगंज) शामिल है।

श्रेणीसांसदों के नाम
सर्वाधिक खर्च करने वालेप्रदीप कुमार सिंह (अररिया), वीणा देवी (वैशाली), विजय लक्ष्मी देवी (सीवान)
सक्रिय सांसदराजभूषण चौधरी (मुजफ्फरपुर), सुधाकर सिंह (बक्सर), रामप्रीत मंडल (झंझारपुर), दिनेश चंद्र यादव (मधेपुरा)
अन्य सक्रिय नामराजेश वर्मा (खगड़िया), दिलेश्वर कामत (सुपौल), गिरधारी यादव (बांका)

MPLADS फंड का गणित;
सालाना बजट: प्रत्येक सांसद को प्रति वर्ष ₹5 करोड़ मिलते हैं (5 साल में कुल ₹25 करोड़)।
वर्तमान स्थिति: 18वीं लोकसभा के दो वित्तीय वर्षों में प्रति सांसद लगभग ₹9.80 करोड़ आवंटित हुए हैं (प्रशासनिक कटौती के बाद)।
बिहार का कुल योगदान: बिहार के सांसदों ने अब तक कुल ₹137.69 करोड़ खर्च किए हैं और ₹394.46 करोड़ के प्रस्ताव दिए हैं।
फंड की प्रकृति: यह फंड ‘नॉन-लैप्सेबल’ होता है। यानी अगर इस साल पैसा खर्च नहीं हुआ, तो वह अगले साल के बजट में जुड़ जाता है।

नियम और प्रक्रिया: कैसे खर्च होता है पैसा?
सांसद अपनी मर्जी से पैसा कहीं भी नहीं बांट सकते, इसके लिए सख्त नियम हैं:
पोर्टल: सांसदों को e-Sakshi पोर्टल पर विकास कार्यों की अनुशंसा (Recommend) करनी होती है।
क्रियान्वयन: जिला योजना पदाधिकारी इन कार्यों को पूरा करवाते हैं।
टेंडर: ₹15 लाख से अधिक के कार्यों के लिए टेंडर अनिवार्य है।
पाबंदियां: सांसद यह निधि किसी व्यक्ति को निजी तौर पर या मंदिर-मस्जिद जै

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