PM मोदी की “आदर्श ग्राम” योजना पर NDA के सांसदों को नहीं है भरोसा.

City Post Live

 

सिटी पोस्ट लाइव : पीएम मोदी के सांसदों को PM मोदी की योजनाओं पर भरोसा नहीं है. देश में सबसे बुरा हाल बिहार के सांसदों का है. 2014 में पहली बार पीएम पद की शपथ लेने के बाद मोदी ने देशभर के सांसदों से एक–एक गांव को गोद लेने की अपील की थी.लेकिन मोदी की इस अपील को उनके सांसदों ने ही गंभीरता से नहीं लिया.बिहार में ही अभी BJP के 12 और NDA के कुल 30 सांसद लोकसभा में हैं, लेकिन इनमें से महज 2 सांसदों ने ही गांव गोद लिए हैं.  पीएम ने यह योजना जयप्रकाश नारायण यानी जेपी की जयंती के मौके पर 11 अक्टूबर 2014 को लॉन्च की थी. योजना को लॉन्च हुए, 10 साल से ज्यादा बीत चुके हैं. लेकिन एक भी गांव आदर्श नहीं हो पाया.

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बिहार से केंद्र में 8 मंत्री हैं, इनमें से 4 कैबिनेट मंत्री हैं, इनमें से सिर्फ ‘हम’ पार्टी के जीतनराम मांझी ने ही गांव गोद लिया है.बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। 2024 में बीजेपी–जेडीयू ने 12-12 सीटें जीतीं। चिराग पासवान की एलजेपी–आर ने 5, जीतन राम मांझी की हम ने एक सीट जीती. 4 सीटें कांग्रेस, 4 आरजेडी, 1 माले और 1 सीट निर्दलीय पप्पू यादव ने जीती. राज्यसभा की बिहार में 16 सीटें हैं. इनमें से 10 पर NDA, 5 पर राजद और 1 सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. लोकसभा के 40 सांसदों में से महज 3 सांसदों सांसद जीतन राम मांझी और दिनेश चंद्र यादव  और  तारिक अनवर ने गाँव को गोद लिया है.बिहार के चार सांसद गिरिराज सिंह, राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, जीतन राम मांझी और चिराग पासवान पीएम मोदी के कैबिनेट में मंत्री हैं. राज्यमंत्री के रूप में रामनाथ ठाकुर, नित्यानंद राय, सतीश चंद्र दुबे और राजभूषण चौधरी निषाद शामिल हैं.

जिन तीन सांसदों ने आदर्श ग्राम योजना के तहत तीन गावों को गोद लिया है, वहां आजतक कोई काम नहीं हो पाया है.एक भी आदर्श ग्राम अबतक नहीं बन पाया है.सांसदों का कहना है कि मोदी की ये योजना बेकार है.इसके लिए फण्याड ही नहीं मिलता.सांसद अपने सांसद निधि का पैसा इस योजना पर खर्च करने को तैयार नहीं हैं.सबके जेहन में ये सवाल है-सोमवार को भागलपुर आ रहे पीएम मोदी क्या इस योजना की चर्चा करेगें..

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