बिहार चुनाव 2025 में एनडीए को मिले प्रचंड जनादेश के बाद पटना का सियासी तापमान तेजी से चढ़ गया है। नतीजों के महज़ एक दिन बाद ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक अणे मार्ग स्थित आवास पर बीजेपी-जेडीयू नेताओं की लगातार बैठकों ने संकेत दे दिया है कि नई सरकार के गठन को लेकर गहमागहमी अपने चरम पर है। शपथग्रहण की तारीख, मंत्री पदों के बंटवारे और सरकार के प्रारूप को लेकर मंथन अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है, और पटना में सत्ता के गलियारों में हर घंटे हलचल बढ़ती जा रही है।
एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद नीतीश कुमार के एक अणे मार्ग स्थित आवास पर गुरुवार सुबह से ही नेताओं का आना-जाना तेज हो गया। सबसे पहले जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा पहुंचे, फिर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने चुनाव परिणामों, नई सरकार की रूपरेखा और एनडीए की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और लोजपा-रामविलास प्रमुख चिराग पासवान भी नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। चिराग ने एनडीए को मिले जनादेश पर मुख्यमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि गठबंधन मिलकर बिहार को नई दिशा देगा। जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी, श्याम रजक और कई अन्य नेता भी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जिससे यह साफ संकेत मिला कि जेडीयू अपने संभावित मंत्रियों और विभागों के बंटवारे को लेकर गंभीर मंथन कर रही है। वहीं सहयोगी दलों के बीच मंत्रालयों के विभाजन, विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और गृह विभाग को लेकर बातचीत तेज है। सूत्र बताते हैं कि इस बार कैबिनेट में युवा चेहरों को अधिक जगह देने पर सहमति बन रही है। नीतीश कुमार ने सभी नेताओं के साथ बैठक कर सरकार गठन, शपथ समारोह और एनडीए की कार्ययोजना पर सुझाव लिए। चर्चा है कि जल्द ही एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाकर औपचारिक तौर पर नीतीश को नेता चुना जाएगा, जिसके बाद राज्यपाल से मिलकर सरकार गठन का दावा पेश किया जाएगा। बढ़ती हलचल साफ संकेत दे रही है कि बिहार में नई सरकार की औपचारिक तस्वीर अब कुछ ही दिनों में सामने होगी।
बिहार की सियासत में अब सारी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार में किसे क्या जिम्मेदारी मिलेगी और कैबिनेट का नया स्वरूप कैसा होगा। हालांकि एनडीए नेतृत्व बार-बार यह संदेश दे रहा है कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और एक स्थिर, मजबूत तथा विकासोन्मुख सरकार देने के लिए प्रतिबद्ध है। कुल मिलाकर, 2025 के जनादेश ने एनडीए की स्थिति को पहले से ज्यादा मजबूत कर दिया है, और लगातार जारी बैठकों से साफ है कि नई सरकार के शपथ ग्रहण तक की तैयारियाँ लगभग अंतिम चरण में पहुँच चुकी हैं। बिहार में एक नई राजनीतिक शुरुआत अब बस औपचारिक घोषणा की प्रतीक्षा कर रही है।