सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों ने निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) के सामने एक महत्वपूर्ण सुझाव रखा है। आयोग की टीम द्वारा चुनाव तैयारियों का जायजा लेने के लिए पटना दौरे के दौरान, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से मांग की है कि विधानसभा चुनाव छठ पूजा (Chhath Puja) के तुरंत बाद और कम से कम चरणों में कराए जाएं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त एसएस संधू व विवेक जोशी की मौजूदगी में छह राष्ट्रीय और छह राज्य स्तरीय पार्टियों के प्रतिनिधियों ने शनिवार को यह सुझाव दिया। दलों का तर्क है कि दिवाली के बाद मनाया जाने वाला महापर्व छठ, जो इस साल 25 से 28 अक्टूबर के बीच होगा, बिहार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
त्योहारों के कारण बढ़ेगी मतदाताओं की भागीदारी
राजनीतिक दलों ने आयोग को बताया कि दिवाली और खासकर छठ के दौरान, बिहार से बाहर नौकरी करने वाले या रहने वाले प्रवासी बिहारी बड़ी संख्या में त्योहार मनाने के लिए अपने घर लौटते हैं। यदि चुनाव छठ पूजा के तुरंत बाद कराए जाते हैं, तो इन लाखों मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे मतदान का प्रतिशत बढ़ने की पूरी संभावना है। उनका मानना है कि मतदाताओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का यह सबसे अच्छा समय है।
बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है। निर्वाचन आयोग के अधिकारी विधानसभा चुनाव से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा के लिए पटना की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। सूत्रों के अनुसार, पहले चरण का मतदान छठ के तुरंत बाद, यानी अक्टूबर के अंत या नवंबर के पहले सप्ताह में होने की संभावना है, ताकि 22 नवंबर से पहले पूरी प्रक्रिया संपन्न की जा सके।
कम चरणों में चुनाव पर जोर
दलों ने इस बात पर भी जोर दिया कि विधानसभा चुनाव को कम से कम चरणों में आयोजित किया जाना चाहिए। पिछले विधानसभा चुनाव (वर्ष 2020) कोविड-19 महामारी की छाया में हुए थे और उस समय चुनाव तीन चरणों में संपन्न हुए थे। राजनीतिक दलों का मानना है कि कम चरणों में चुनाव कराने से प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा, साथ ही राजनीतिक गतिविधियां भी कम समय में सिमट जाएंगी।
निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों के इस सुझाव को गंभीरता से लिया है और वह सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए ही अंतिम चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा। आयोग का प्रयास है कि चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और अधिक से अधिक मतदाताओं की भागीदारी के साथ संपन्न हों। राज्य में राजनीतिक हलचल तेज होने के साथ ही, सभी की निगाहें अब निर्वाचन आयोग पर टिकी हैं कि वह बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कब करता है।