सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात पटना पुलिस ने उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी के तुरंत बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व—राहुल गांधी और प्रियंका गांधी—ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे केंद्र और बिहार सरकार की सोची-समझी साजिश करार दिया है।
मध्यरात्रि की कार्रवाई और पुराना मामला
पटना पुलिस के अनुसार, पप्पू यादव को 1995 के एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया है, जो गर्दनीबाग थाने से संबंधित है। सांसद पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र जैसी धाराएं (419, 420, 468, 448, 506 और 120बी) लगी हुई हैं। बताया जा रहा है कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान लगातार अनुपस्थित रहने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस ने उन्हें शुक्रवार देर रात मंदिरी स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया।
राहुल गांधी का तीखा हमला: ‘सिस्टम की सड़ांध उजागर’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस गिरफ्तारी को NEET छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले से जोड़ते हुए सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा: “पटना में NEET आकांक्षी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने सिस्टम की गहरी सड़ांध को उजागर कर दिया है। पीड़ित परिवार को न्याय देने के बजाय भाजपा-NDA मॉडल अपराधियों को संरक्षण दे रहा है। सांसद पप्पू यादव मजबूती से न्याय की आवाज उठा रहे थे, इसलिए उन्हें डराने और दबाने के लिए यह गिरफ्तारी की गई है।” राहुल ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई केवल एक राजनीतिक प्रतिशोध है ताकि कोई भी सरकार से जवाबदेही न मांग सके।
प्रियंका गांधी ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पटना हॉस्टल मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा कि सरकार का रवैया खौफनाक है। उन्होंने हाथरस और उन्नाव जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकारें अक्सर पीड़ितों के बजाय आरोपियों के साथ खड़ी नजर आती हैं। प्रियंका के अनुसार, पप्पू यादव की गिरफ्तारी उसी असंवेदनशील कड़ी का हिस्सा है जो न्याय की मांग करने वालों को चुप कराना चाहती है।
क्या है NEET छात्रा मामला?
हाल ही में पटना के एक हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत और उसके बाद लगे बलात्कार के आरोपों ने बिहार में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पप्पू यादव इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर लगातार मुखर थे। विपक्ष का आरोप है कि इसी दबाव को कम करने के लिए प्रशासन ने दशकों पुराने मामले को आधार बनाकर उन्हें गिरफ्तार किया है।