सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजनीति में हलचल उस समय तेज हो गई जब राबड़ी देवी का सरकारी आवास, जो 10 सर्कुलर रोड पर स्थित है, अचानक खाली किए जाने की खबर आई। पिछले 20 वर्षों से इस बंगले में रह रही राबड़ी देवी के आवास से देर रात फूलों के गमले, फर्नीचर और अन्य घरेलू सामान बाहर ले जाए जाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आईं। इन तस्वीरों ने सियासी माहौल में तूफान मचा दिया है और अब इसे न केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया, बल्कि नैतिकता, परंपरा और राजनीतिक प्रतीक से भी जोड़ा जा रहा है।
सत्ताधारी जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्ति को लेकर कोई भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राबड़ी देवी को सरकारी नियमों का पालन करना चाहिए, जैसे सत्ता में रहते हुए वे विपक्षी नेताओं को नियमों की दुहाई देती थीं।
इसके अलावा, जदयू ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले एक महीने से जारी सरकारी नोटिस के बाद राबड़ी देवी को अपना आवास जल्दी से खाली कर लेना चाहिए था। भाजपा नेताओं ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इतने वर्षों तक सरकारी आवास का इस्तेमाल करना जनता के पैसे का दुरुपयोग है।
वहीं, राजद नेताओं का कहना है कि यह सब राजनीतिक दबाव के कारण हो रहा है और यह कार्रवाई विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए की जा रही है। उनके अनुसार, राबड़ी देवी को एक पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर कुछ विशेष सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं और इस तरह की अचानक कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना को दर्शाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 10 सर्कुलर रोड केवल एक आवास नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति का प्रतीक बन चुका है। यह वही बंगला है जहां लालू-राबड़ी परिवार की राजनीति का एक लंबा दौर देखा गया है। अब इस बंगले का खाली किया जाना राजद के लिए एक भावनात्मक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मोड़ है।