पुनौरा धाम बनी बिहार की सियासी धुरी: शाह-नीतीश के बाद राहुल-तेजस्वी ने टेका माथा

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले, माता सीता की जन्मस्थली पुनौरा धाम राज्य की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के एजेंडे को धार देने में जुटी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बाद अब कांग्रेस और उसके सहयोगी भी इस धार्मिक स्थल पर पहुंच रहे हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि सभी दल सियासी लाभ के लिए धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

हाल ही में, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मिलकर पुनौरा धाम में माता सीता के भव्य मंदिर की आधारशिला रखी थी। यह कदम बीजेपी और जनता दल (यूनाइटेड) द्वारा मिथिला क्षेत्र को साधने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमित शाह ने इस मौके पर घोषणा की थी कि अयोध्या में जिस तरह भगवान राम का भव्य मंदिर बन रहा है, उसी तर्ज पर सीतामढ़ी में भी माता सीता का भव्य मंदिर बनाया जाएगा। बीजेपी इस प्रोजेक्ट का श्रेय लेकर मिथिला और पूरे बिहार में एक मजबूत धार्मिक संदेश देना चाहती है।

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दूसरी ओर, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ जब सीतामढ़ी पहुंची, तो दोनों नेताओं ने भी माता जानकी के मंदिर में जाकर माथा टेका और पूजा-अर्चना की। यह कदम विपक्षी महागठबंधन द्वारा हिंदुत्व के मुद्दे पर बीजेपी के दांव का जवाब माना जा रहा है। इस यात्रा के माध्यम से, राहुल और तेजस्वी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वे भी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं और सभी धर्मों को साथ लेकर चलते हैं।

पुनौरा धाम को अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। नीतीश कुमार ने दो साल पहले ही इसके विकास की घोषणा की थी, और अब इस पर काम शुरू हो गया है। पुनौरा धाम हिंदू धर्म में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, और सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों गठबंधनों का पुनौरा धाम में माथा टेकना महज एक संयोग नहीं है, बल्कि यह बिहार की चुनावी जंग में धार्मिक प्रतीकों और भावनाओं का इस्तेमाल करने की एक सोची-समझी रणनीति है।

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