गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर स्वदेशी गन से गूंजेगी 21 तोपों की सलामी, सैन्य तालमेल से पहले हुई ‘शस्त्र पूजा’

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ की ऐतिहासिक सड़क एक बार फिर भारतीय सेना के शौर्य और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की गवाह बनने जा रही है। इस बार की 21 तोपों की सलामी न केवल अनुशासन का प्रतीक होगी, बल्कि पूरी तरह स्वदेशी शक्ति से लैस होगी। सेरेमोनियल बैटरी के मेजर पवन सिंह शेखावत ने इस गौरवशाली क्षण की तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं।

स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन: आत्मनिर्भरता का शंखनाद
साल 2023 से भारतीय सेना ने एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए विदेशी तोपों की जगह स्वदेशी हथियारों को अपनाया है। इस बार सलामी के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन का उपयोग किया जाएगा। यह तोप पूरी तरह से भारत में निर्मित है और इसकी मारक क्षमता 17.2 किलोमीटर तक है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका ‘हेली-पोर्टेबल’ होना है, जिसका अर्थ है कि दुर्गम इलाकों में इसे हेलीकॉप्टर के जरिए भी आसानी से तैनात किया जा सकता है। यह गन एक मिनट में 6 राउंड फायर करने में सक्षम है।

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परंपरा और शक्ति: सलामी से पहले ‘शस्त्र पूजा’
सैन्य अभ्यास और रिहर्सल के बीच कर्तव्य पथ पर एक आध्यात्मिक दृश्य भी देखने को मिला। सलामी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले भारतीय सेना के जवानों ने अपनी तोपों और हथियारों की ‘शस्त्र पूजा’ की। यह परंपरा सेना के उस अटूट विश्वास को दर्शाती है जिसमें हथियारों को केवल मशीन नहीं, बल्कि राष्ट्र की रक्षा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

52 सेकंड का अद्भुत सैन्य समन्वय
21 तोपों की सलामी कोई साधारण प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह समयबद्धता (Time Management) की पराकाष्ठा है। मेजर शेखावत के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया राष्ट्रपति द्वारा ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की सलामी के साथ सटीक तालमेल में होती है। इसे ठीक 52 सेकंड के भीतर पूरा किया जाता है। एक सेकंड की भी देरी या चूक इस ऐतिहासिक समन्वय को बिगाड़ सकती है, इसलिए इसकी कई चरणों में कड़ी रिहर्सल की जा चुकी है।

विदेशी मेहमान और कूटनीतिक संदेश
इस वर्ष का गणतंत्र दिवस समारोह कूटनीतिक दृष्टि से भी खास है। इस बार समारोह में यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं। उनकी उपस्थिति भारत और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों की पुष्टि करती है।

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