Bihar Politics:
सिटी पोस्ट लाइव : अब आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष का नाम लगभग तय हो गया है. नामांकन के दो दिन पहले तक प्रदेश अध्यक्ष के पद की दौड़ में आलोक मेहता और मंगनीलाल मंडल रेस मे थे. लेकिन अब यह लगभग तय हो गया कि प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद के स्थानापन्न अब मंगनी लाल मंडल ही होंगे. प्रदेश अध्यक्ष का चयन अब तक निर्विरोध ही हुआ है. सुप्रीमो लालू प्रसाद की पसंद व अनुमति से मात्र एक नामांकन होता रहा है. इसकी संभावना प्रबल है कि शनिवार को एकमात्र मंडल का ही नामांकन हो. शुक्रवार तक किसी ने भी नामांकन-पत्र नहीं लिया है.
आरजेडी नामांकन-पत्र भी उसे ही देता है, जिसके लिए सुप्रीमो लालू प्रसाद का संकेत होता है. अब तेजस्वी की पसंद । ही फाइनल होता है. तेजस्वी यादव का जोर आती-पिछड़ा समाज को साधने पर है. ईबीसी में धानुक जाति से आने वाले मंडल के साथ एक विशेषता मिथिला का निवासी होना भी है, जहां कभी आरजेडी बहुत मजबूत हुआ करती थी. विधानसभा के पिछले चुनाव में महागठबंधन वहाँ कमजोर नजर आई.ऐसे में मिथिला पर विशेष फोकस है. इसी लक्ष्य के साथ राजद 18 जनवरी को मंडल को जेडीयू से अपने पाले में ले आया था. मिथिला में पचपनिया कहे जाने वाले वस्तुत: ईबीसी ही हैं.
उजियारपुर का प्रतिनिधित्व करने वाले आलोक मेहता कुशवाहा समाज से हैं. लोकसभा चुनाव से ही इस समाज को साधने की कोशिश तेजस्वी यादव कर रहे हैं . पार्टी संसदीय दल के नेता अभय कुशवाहा भी इसी समाज से हैं. आरजेडी की सत्ता में वापसी होने पर मेहता सरकार के प्रमुख चेहरों में से एक होंगें . अभी वे महागठबंधन समन्वय समिति के सदस्य हैं. लालू की इच्छा और तेजस्वी की राजनीतिक संभावनाओं के बीच तालमेल बिठाकर संगठन को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है. कई नामों पर चर्चा के बाद अब्दुल बारी सिद्दिकी को भरोसेमंद माना गया, लेकिन बढ़ती उम्र और पूर्व-निर्धारित दायित्वों का हवाला देकर उन्होंने मना कर दिया. सिद्दिकी अभी राष्ट्रीय इकाई मेंं प्रधान महासचिव हैं और आगे भी उनके इस पद पर बने रहने की संभावना है.उनके लिए पुरानी और नई पीढ़ी के बीच समन्वय बनाने की चुनौती है. शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि अपने राजनीतिक अनुभव का उपयोग करते हुए मंडल इस चुनावी वर्ष में आरजेडी को फायदा पहुंचा सकते ।