बिहार चुनाव पर RJD का बड़ा वार, EVM में हेरफेर से मिली हार…

Ritu Raj

हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार की समीक्षा करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने मंगलवार को पखवाड़े भर चली मैराथन बैठक के बाद चुनावी नतीजों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने हार की वजह बड़े पैमाने पर “EVM में हेरफेर”, “अदृश्य शक्तियों के दखल” और संगठन के भीतर “संचार की कमी” को बताया है। पार्टी ने यह कहते हुए चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा कि जब अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों ने ईवीएम छोड़ दी हैं, तो भारत में इनका प्रयोग क्यों जारी है। पार्टी ने बैलट पेपर की वापसी की मांग करते हुए चुनाव प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता बताई है।

पार्टी की समीक्षा बैठक में उम्मीदवारों, जिला अध्यक्षों, पूर्व विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व के सामने खुलकर अपनी बात रखी। अधिकांश पदाधिकारियों का कहना था कि तेजस्वी प्रसाद यादव को विपक्ष के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में मिल रही अभूतपूर्व लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें बेहतर नतीजों की उम्मीद थी, लेकिन वास्तविक परिणाम उम्मीदों और जनता के मूड से उलट निकले। बैठक में यह भी सामने आया कि 1.4 करोड़ महिला लाभार्थियों के बीच चुनाव से पहले हुए धन वितरण ने मतदाताओं के रुझान को प्रभावित किया। साथ ही कई नेताओं ने इस पर भी जोर दिया कि कुछ ‘अदृश्य शक्तियों’ ने चुनावी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया। इसी बीच पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने दावा किया कि बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और एजेंटों ने मतदान केंद्रों पर ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत की है। उनके मुताबिक, “243 में से हर विधानसभा क्षेत्र की ईवीएम वाई-फाई से जुड़ी थीं और ऊपरी स्तर के अधिकारियों की निगरानी में थीं। जब मशीनें कहीं रखी हों और इंटरनेट से कनेक्टेड भी हों, तो किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।”

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समीक्षा बैठक में कई कार्यकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि 2020 की तुलना में इस बार पार्टी का कुल वोट शेयर तो बढ़ा, लेकिन सीटें 75 से घटकर सिर्फ 25 रह गईं। उनका कहना था कि INDIA ब्लॉक को करीब 1.90 करोड़ मत मिले, जो 2020 के मुकाबले लगभग 32 लाख अधिक हैं। हालांकि, फिर भी नतीजे एनडीए के पक्ष में कैसे चले गए, यह समझ से परे है। कई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया, “अदृश्य शक्तियों ने हमारा जनादेश छीन लिया… हम इससे ज़्यादा कुछ नहीं कह सकते।” हार की वजहों में संगठन के भीतर संचार की कमी और चुनाव अभियान के दौरान तेजस्वी यादव का अत्यधिक व्यस्त कार्यक्रम भी प्रमुख कारणों के रूप में सामने आया। कार्यकर्ताओं ने बताया कि पार्टी के वफादार और ज़मीनी कार्यकर्ताओं के लिए नेतृत्व तक पहुंचना मुश्किल रहा, जिससे महत्वपूर्ण सूचनाएँ और स्थानीय फीडबैक ऊपर तक नहीं पहुँच पाए। वहीं, कई नेताओं ने तेजस्वी यादव को सलाह दी कि वे ज़मीनी स्तर से जुड़ाव मजबूत करने के लिए “पार्टी और अपने दिल दोनों के दरवाज़े और खुले रखें”, ताकि कार्यकर्ताओं की बात सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुँच सके और संगठनात्मक तालमेल बेहतर हो सके।

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