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भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह के निजी घरेलू विवाद ने अब बिहार की सियासत में बड़ी हलचल मचा दी है। पवन सिंह के बीजेपी में दोबारा शामिल होने और आगामी विधानसभा चुनाव में उनके इस्तेमाल की अटकलों के बीच, उनकी पत्नी ज्योति सिंह द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को राजनीतिक रूप से उछाले जाने की चर्चा ज़ोरों पर है। राजनीतिक विश्लेषक इसे राजपूत-कुशवाहा समीकरण को प्रभावित करने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।
राजपूत वोट बैंक पर बीजेपी की रणनीति
पवन सिंह की बीजेपी में वापसी से भोजपुर, रोहतास, भभुआ, बक्सर और औरंगाबाद जैसे जिलों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह क्षेत्र राजपूत बहुल माना जाता है और पिछले लोकसभा चुनाव में काराकाट सीट पर पवन सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 2.74 लाख वोट हासिल कर अपनी जनता के बीच पकड़ साबित की थी।
बीजेपी की रणनीति स्पष्ट है कि वह पवन सिंह की लोकप्रियता का इस्तेमाल करके बिखरे हुए राजपूत वोट बैंक को फिर से एकजुट करना चाहती है। विश्लेषकों का मानना है कि इस रणनीति के कारण राजद, कांग्रेस और भाकपा माले की नींद उड़ गई है। इन विपक्षी दलों के लिए पवन सिंह की सक्रियता को ‘कैसे काबू में किया जाए’ यह एक प्रमुख चिंता बन गई है।
ज्योति सिंह की चुनावी तैयारी में विपक्ष का कनेक्शन?
पवन सिंह के घरेलू विवाद के राजनीतिकरण का शक इसलिए गहरा रहा है क्योंकि ज्योति सिंह ने खुद यह दावा किया है कि वह पिछले एक साल से राजद के संपर्क में हैं और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं।
जनसंपर्क अभियान: अगस्त 2025 में, जब उनका तलाक का मामला कोर्ट में चल रहा था, ज्योति सिंह ने काराकाट, नबीनगर और डिहरी जैसे राजपूत बहुल विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चलाया था। महत्वपूर्ण बात यह है कि उस समय उन्होंने पवन सिंह पर कोई गंभीर आरोप नहीं लगाए थे।
स्वतंत्र पहचान: जनसंपर्क के दौरान उन्होंने खुद को केवल ‘पवन सिंह की पत्नी’ के बजाय इस क्षेत्र की बेटी के रूप में पेश करने की कोशिश की थी। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा जैसे सामाजिक मुद्दों पर फोकस किया और महिलाओं के साथ बैठकें कीं।
कुशवाहा बनाम राजपूत समीकरण में फंसा विवाद
पवन सिंह-ज्योति सिंह विवाद के पीछे की राजनीतिक गुत्थी राजपूत और कुशवाहा समीकरणों से जुड़ी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में काराकाट सीट पर पवन सिंह ने निर्दलीय लड़कर एनडीए के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ ताल ठोकी थी। पवन सिंह की उम्मीदवारी से राजपूत वोट बुरी तरह बंट गए थे, जिसका सीधा नुकसान कुशवाहा को हुआ था।
अब जबकि पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उन्हें काराकाट से टिकट मिलता है, तो वे चुनाव लड़ेंगी, तो यह माना जा रहा है कि विपक्षी दल इस घरेलू विवाद का इस्तेमाल पवन सिंह की छवि को ध्वस्त करने और राजपूत वोटों को बीजेपी से दूर रखने के लिए कर रहे हैं। यदि ज्योति सिंह को महागठबंधन टिकट देता है, तो यह सीधा संदेश जाएगा कि वे ‘उत्पीड़न की शिकार महिला’ के साथ खड़े हैं, जो पवन सिंह की राजपूत वोटों पर पकड़ को कमजोर कर सकता है।
यह विवाद केवल एक पारिवारिक कलह न रहकर बिहार की सियासत में एक नई हलचल पैदा कर चुका है, जो आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।