संतोष सुमन तीसरी बार मंत्री, जीतन राम मांझी ने बेटे को बनाया कैबिनेट में हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा का प्रतिनिधि

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में एनडीए सरकार के नए गठन के साथ ही हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने एक बार फिर अपने नेतृत्व की रणनीति को स्पष्ट कर दिया है। पार्टी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य (MLC) संतोष कुमार सुमन पर विश्वास जताते हुए उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में तीसरी बार मंत्री बनाया है। यह निर्णय न केवल पार्टी के भीतर उनकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि संतोष सुमन ही अब ‘हम’ पार्टी के लिए स्थायी और विश्वसनीय नेतृत्व का चेहरा बन चुके हैं।

विधायकों पर MLC को तरजीह: एक सुविचारित रणनीति
इस बार के विधानसभा चुनाव में ‘हम’ पार्टी ने पाँच नई सीटों—इमामगंज, कुटुंबा, बाराचट्टी, अतरी और सिकंदरा—पर जीत हासिल कर अपनी ताकत बढ़ाई है। इन नव-निर्वाचित विधायकों में पार्टी संस्थापक जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी भी शामिल हैं।

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इसके बावजूद, पार्टी ने विधानसभा से चुने गए नए चेहरों के बजाय, एमएलसी संतोष सुमन को ही मंत्रिमंडल में भेजने का निर्णय लिया। राजनीतिक गलियारों में इसे मांझी परिवार की एक सुविचारित राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य संतोष सुमन को पार्टी की नीति, पहचान और सरकारी भूमिका का अडिग केंद्र बनाए रखना है। यह स्पष्ट संकेत है कि पार्टी अपने भविष्य का नेतृत्व उन्हीं के हाथों में देख रही है।

शिक्षित और विचारशील नेतृत्व
संतोष सुमन सिर्फ राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे एक मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि रखने वाले नेता भी हैं। उनकी शैक्षिक योग्यता उन्हें मंत्रिमंडल में एक विचारशील और शिक्षित चेहरे के रूप में प्रस्तुत करती है। उन्होंने राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री हासिल की है। वह यूजीसी–नेट पास हैं। उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।

राजनीति में आने से पहले, वह एक लेक्चरर और सामाजिक कार्यकर्ता भी रहे, जिसने उन्हें जमीनी स्तर के मुद्दों और शिक्षा के महत्व की गहरी समझ दी।

राजनीतिक सफर: मुखरता और दृढ़ता
अपने राजनीतिक करियर के दौरान, संतोष सुमन ने अनुसूचित जाति–जनजाति कल्याण विभाग में मंत्री रहते हुए कई योजनाओं पर तेज़ी से काम किया। 2023 में उनका मंत्रिमंडल से “दबाव” का हवाला देकर इस्तीफा देना एक बड़ा राजनीतिक कदम था, जिसने उन्हें राज्य भर में सुर्खियों में ला दिया और पार्टी के भीतर उनका कद और बढ़ा दिया। दलित, महादलित और पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दों पर उनकी मुखरता और दृढ़ता उन्हें अन्य क्षेत्रीय नेताओं से अलग स्थापित करती है।

संतोष सुमन की यह तीसरी पारी ‘हम’ पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ा संदेश है कि उनकी राजनीतिक परिपक्वता और संगठनात्मक पकड़ आने वाले वर्षों में पार्टी को और अधिक मजबूत और स्थिर नेतृत्व प्रदान करेगी।

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