SC के खिलाफ निशिकांत दुबे के बयान पर बवाल,पार्टी बयान से किया किनारा.

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सिटी पोस्ट लाइव :सुप्रीम कोर्ट पर बीजेपी नेता और सांसद निशिकांत दुबे के बयान को लेकर राजनीतिक बवाल शुरू है.निशिकांत दुबे के बयान को लेकर सभी विरोधी दलों ने मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग, मंत्री और बीजेपी के सांसद सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ बोल रहे हैं. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि कानून बनाते समय संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ नहीं जाना चाहिए. अगर कोई कानून संविधान के खिलाफ है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा. जयराम रमेश ने इलेक्टोरल बॉन्ड जैसे कई मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट के सरकार के फैसलों को असंवैधानिक बताने का भी जिक्र किया.

कांग्रेस नेता  पवन  खेडा ने कहा कि ना इनकी संविधान में आस्था है और ना ही इनका न्यायपालिका में विश्वास है.बीजेपी  के सांसद की ये अराजक भाषा लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक है. ये सब मोदीजी की मूक सहमति से हो रहा है.सपा नेता एसटी हसन ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम के नाम पर वोट हासिल करने की कोशिश करने वाले लोग अराजकता फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं. जिन लोगों को अजान, हिजाब पसंद नहीं है और जो मदरसों पर बुलडोजर चलाते हैं, वही लोग गृहयुद्ध कर रहे हैं, न कि सुप्रीम कोर्ट. सुप्रीम कोर्ट संविधान और लोकतंत्र की रक्षा कर रहा है.

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निशिकांत दुबे के बयान से बीजेपी ने किनारा कर लिया है. जेपी नड्डा ने बयान जारी कर कहा कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा का न्यायपालिका एवं देश के चीफ जस्टिस पर दिए गए बयान से भारतीय जनता पार्टी का कोई लेना–देना नहीं है. यह इनका व्यक्तिगत बयान है, लेकिन भाजपा ऐसे बयानों से न तो कोई इत्तेफाक रखती है और न ही कभी भी ऐसे बयानों का समर्थन करती है. पार्टी ने सदैव ही न्यायपालिका का सम्मान किया है, उनके आदेशों और सुझावों को सहर्ष स्वीकार किया है,क्योंकि एक पार्टी के नाते हमारा मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय सहित देश की सभी अदालतें हमारे लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं तथा संविधान के संरक्षण का मजबूत आधारस्तंभ हैं.

गौरतलब है  कि निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर देश में ‘धार्मिक युद्ध भड़काने’ का आरोप लगाया है. उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर कानून सुप्रीम कोर्ट को ही बनाने हैं तो संसद भवन को बंद कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सिर्फ चेहरा देखकर कानून बनाता है. सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमा से बाहर जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट का एक ही मकसद है तुम मुझे चेहरा दिखाओ, मैं तुम्हें कानून दिखाऊंगा.

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